असत्य की राह क्षणिक सुख का प्रलोभन देती है जो मिट जाने वाला है

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सत्य की राह सांई तक ले जाती है : सुमित पोंदा
असत्य की राह क्षणिक सुख का प्रलोभन देती है जो मिट जाने वाला है
कैथल, 25 दिसंबर (कृष्ण गर्ग)
सत्य की राह मुश्किलों भरी होती ही है लेकिन सुख की डगर को ले जाती है। रास्ते के दुखों से डरना नहीं। राह बदलने के प्रलोभन भी मिलेंगे और छद्म सुख की अभिलाषा भी मन को डिगाने की कोशिश करेगी। लालच में मत पडऩा। सत्य की राह सांई तक ले जाती है जो स्थाई सुखकारक होता है। वहीं असत्य की राह क्षणिक सुख का प्रलोभन देती है जो मिट जाने वाला है। अपने विवेक को साई को अर्पित कर उसे प्रार्थना करें कि सही राह पर लिए चले और वो यह करता भी है। अपने हाथों में हमारा हाथ लिए सांई सदा साथ चलता है। यह विचार विश्वविक्चयात कथावाचक सुमित भाई पोंदा ने सोमवार सांय को शहीद उद्यम सिंह किले पर आयोजित सांई अमृत कथा के तीसरे दिन व्यञ्चत किए। सांई अमृत कथा में श्रद्घालुओं को सांई भञ्चित में लीन करते हुए सुमित पोंदा ने कहा कि हम अकसर उसे ही सच मान लेते हैं जो हमें दिखाई देता है लेकिन सच तो यह है कि जो हमेशा दिखाई देता है वो हम अपनी बुद्धि, द्वेष, राग, पूर्वाग्रह से ग्रसित हो कर देखते हैं। हमें वही दिखता है जो हम देखना चाहते हैं। हमें वही समझ में आता है जो हम समझना चाहते हैं। अपनी सोच के दायरे में हम जो भी छाया बना लेते हैं, हम वही देखते और मानते हैं। अगर मन की गहराइयों में उतरें, विवेक से सोचें तो हमें वही दिखाई देगा जो सत्य है। विवेक को जागृत करने के लिए सद्गुरु सांई की शरण नितांत आवश्यक है। वहीं जाकर सारे राग, द्वेष और पूर्वाग्रह नष्ट होते हैं और सत्य दिखाई देने लगता है। सुमित पोंदा ने श्री साई अमृत कथा कहती है कि परिहास या मजाक एक ऐसा क्षेत्र है जहां पर कदम रखते ही हम सीमाओं को भूल जाते हैं। मजाक स्वस्थ हो और किसी के अपमान का जरिया न बन जाए वहां तक तो ठीक है मगर मजाक का बहाना बना कर हम उन सीमाओं को सहज ही उलांघ जाते हैं। इसी मजाक का पर्दा बना कर हम जब चाहें तब किसी से कैसी भी, किसी के भी सामने और किसी भी वञ्चत पर अपने मन की बात तंज में कह देते हैं। जब किसी का अपमान होता है तो वो कभी भी उसे उधार नहीं रखता। वह हिसाब बराबर करने का मौका ढुंढता ही है। मर्यादा का पालन करो जिससे जीवन में कभी अपमानित नहीं होना पड़ेगा। इस अवसर पर साई मंदिर के मुक्चय पुजारी आचार्य विकास लेखवार, पंडित राजीव शर्मा करेंगे, साई मंदिर के प्रमुख सदस्य समाजसेवी कैलाश भगत, अनिल तिवारी, नवीन मल्होत्रा, भारत खुराना, बक्चशीश गिरधर, नवीनपाल, जतिन गांधी, नीतिन गुगलानी, लाजपत गुप्ता, रामनारायण शर्मा, मनोहर विरमानी, अनिल गिरधर, डा. राकेश चावला, सुशील रहेजा, पवन भारती, कृष्ण सलूजा, सुरेन्द्र छाबड़ा, मनोज खुराना, अनिल सलूजा, महेन्द्र कामरा, जगदीश पवार, धर्मवीर भोला , मनोज आनंद, राजेश शर्मा, यशपाल, अनिल सैनी, हरिचंद जांगड़ा, सीपी अरोड़ा , मुकेश धीमान, अनीश गुप्ता, आत्म मिड्डा , प्रवीन बिंदलिश, ललित ठकराल , गौरव छाबड़ा , नीरज ढींगरा , कर्ण कुमार, अंकुश कुमार, गुरमीत सैनी और अक्षय मेहता आदि मौजूद थे।

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