आढ़़तियों को नाम मात्र ने समझे सरकार, गन्ने की पेयमेंट नही दी जाती, फिर सरकार फसल की कैसे देगी।

कैथल, 24 सितम्बर(कृष्ण गर्ग)
मंगलवार को कैथल जिले की सभी अनाज मंडियों के व्यापारियों ने अनाज मंडी में एक दिन की हड़ताल रख ई- प्रणाली के खिलाफ मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त कैथल को एक ज्ञापन दिया। जिसमें किसान यूनियन के द्वारा भी व्यापारियों को साथ दिया। ज्ञापन देने से पूर्व नई अनाज मंडी स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में आढ़तियों ने एक बैठक का भी आयोजन किया। जिसकी अध्यक्षता मंडी प्रधान शमशेर मितल ने की। बैठक को जिला अनाज मंडी प्रधान अश्वनी शोरेवाला ने सम्बोधित किया। उन्होंने आढ़तियों को सम्बोधित करते हुये शोरेवाला ने कहा की किसानों व आढ़तियों में चोली दामन का साथ है। जिसको भाजपा सरकार तोडऩा चाहती है। उन्होंने बताया की ई प्रणाली से किसानों व आढ़तियों में दरार पड़ जायेगी। किसान को चौबीस घंटे सातों दिन पैसे की जरूरत खेती के लिये पड़ती है। किसान अपनी फसल की अदायगी सीधे न लेकर आढ़तियों के माध्यम से लेना चाहते है। यदि सरकार चाहती है कि किसानों की फसल की अदायगी सीधे उनके खाते में दी जाये तो वे ई प्रणाली लागू करने से पूर्व इस बारे में किसानों व आढ़तियों से ब्यान हल्फिया ले। जो किसान सीधे तौर पर अपनी फसल की अदायगी लेना चाहते है वे लिख कर दे दे। उन्होंने बताया की मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर अपने वायदों से मुकर रहे है। प्रदेश भर की मंडियों के आढ़ती 13 बार मुख्यमंत्री स इस बारे में मिल चुके है और हर बार इस प्रणाली को लागू न करने के आस वासन देते रहते है और हर छह माह बाद फिर फसल की अदायगी ई प्रणाली के तहत खरीद करके सीधेतौर पर किसानों के खाते में करने की कहते है। सरकार उन राज्यों की तरह खरीद करना चाहती है, जहां मंडियां नही है और किसानों से नाम मात्र फसल खरीद कर बाकी रहती फसल किसान समर्थन मूल्य से भी काफी कम मूल्य पर बेचने को मजबूर होते है। हरियाणा व पंजाब में किसानों की फसल का एक- एक दाना समर्थन मूल्य पर बिकता है और किसी भी किसान को कोई शिकायत नही है। बैठक के बाद जिला भर की मंडियों ने आये आढ़तियों ने किसान यूनियन के सदस्यों के साथ मिल की मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी दिया। बैठक में पूर्व प्रधान सुरेश चौधरी, धनी राम, मोहन लाल खुरानिया, जय किशन मान, सत्य नारायण शर्मा, जगदीश चंद, राम निवास मितल आदि शामिल थे।

आढ़़तियों को नाम मात्र ने समझे सरकार
मंदिर में बैठक को सम्बोधित करते हुये जिला अनाज मंडी प्रधान ने कहा की चुनाव हमेशा मंडियों से शुरू होता है। मंडी से किसानों, मजदूरों, मुनिमों आदि अनेक वर्करों का वास्ता होता है। प्रदेश में कुल वोट का आधे से ज्यादा वोट मंडियों पर निर्भर करता है। अत: सरकार आढ़तियों को नाम मात्र न समझे। उन्होंने कहा की इन चुनाव में आढ़तियों को आने वाली समस्याओं का समाधान करने का जो भी पार्टी अपने चुनाव घोषण पत्र में शामिल करेगी, उसी को वोट देने का काम करेंगे। चाहे कोई भी पार्टी हो।

गन्ने की पेयमेंट नही दी जाती, फिर सरकार फसल की कैसे देगी।
ज्ञापन देने से पूर्व किसान यूनियन के नेता सतपाल दिल्लोवाली ने कहा की सरकार की तरफ किसानों के गन्ने की फसल की अदायगी कई वर्षों से बकाया है। सरकार से वही नही दी जाती भी फसल की अदायगी तो काफी ज्यादा होती है, वह कैसे देगी। किसान को हर समय आढ़ती के साथ की जरूरत होती है, किसान आढ़ती का साथ नही छोड़ सकते।

ये है आढ़तियों की मांगे।
1. मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल का इस्तेमाल केवल प्राकृतिक आपदा मुआवजा के दौरान करे।
2. किसानों की फसल पहले की तरह आढ़तियों के माध्यम से करे व अदायगी भी आढ़तियों के माध्यम से हो।
3. भावांतर योजना प्रदेश के किसान को ही मिले।
4. हरियणा में नरमा, कपास, चना, सरसों, मक्का, बाजरा, सुरजमुखी आदि भी आढ़तियों के माध्यम से बिके।
5. किसान की फसल का सीधा भुगतान हल्फीय ब्यान देने वाले किसान को ही दिया जाये।
6. दूसरे राज्यों के किसानों को अपनी फसल प्रदेश की मंडियों में बेचने दिया जाये।
7. किसानों की फसल अब 15 सितम्बर से आनी शुरू हो जाती है, अत सरकार तत्काल सरकारी खरीद शुरू करे।
8. मुख्यमंत्री ने डिफालटर निर्यातकों से भुगतान के लिये पुलिस प्रशासन के सहयोग का भरोसा दिया था, परन्तु पुलिस प्रशासन सहयोग नही दे रहा। अत: पुलिस प्रशासन को आदेश दे कि व्यापारियों को ऐसी स्थिति में पुरा सहयोग दे।
9. मंडी में कमेटी के लाइसेंस रिन्यू करण सरल हो और बाकी रहते लाइसेंस रिन्यू किये जाये।
फोटो सहित

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