किसानों का आह्वïान किया कि वे शून्य लागत प्राकृतिक खेती अपनाएं, आमदनी दोगुणी होगी- राज्यपाल

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कैथल, 3 जनवरी (कृष्ण गर्ग)
हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों का आह्वïान किया कि वे शून्य लागत प्राकृतिक खेती अपनाएं। ऐसा करने से खेती पर होने वाला खर्च समाप्त होगा तथा उत्पादन भी बढ़ेगा। प्राकृतिक खेती करने से पर्यावरण संरक्षित रहेगा, भूमि की उपजाऊ शञ्चित बढ़ेगी तथा युवा भी सेहतमंद होंगे। किसानों की आमदनी दोगुणी होगी। इसके अलावा गऊ माता को भी आदर मान मिलेगा। अपने बच्चों को हर प्रकार के नशे से बचाकर रखें, ञ्चयोंकि बच्चे ही देश का भविष्य हैं।
महामहिम राज्यपाल सीवन स्थित राजकीय द्ब्रवायज वरिष्ठï माध्यमिक विद्यालय में जिला सरपंच एसोसिएशन तथा ग्राम पंचायत सीवन द्वारा संयुञ्चत रूप से आयोजित शून्य लागत प्राकृतिक खेती महोत्सव में बतौर मुक्चयातिथि किसानों से रूबरू हो रहे थे। कार्यक्रम से पूर्व आचार्य देवव्रत ने राष्टï्रीय ध्वजारोहण किया। महामहिम राज्यपाल ने कहा कि गत 30 वर्षों के दौरान रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से भूमि की उर्वरा शञ्चित कमजोर हुई है तथा भूमि बंजर होने के कगार पर है। इनके प्रयोग से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी फैली हैं तथा चारों ओर अस्पताल मरीजों से भरे हुए हैं। पर्यावरण प्रदूषित होने से बड़े शहरों में आज हवा भी सांस लेने लायक नही रह गई है। प्रदूषण बढऩे से आज हमें घनी धुंध व कोहरे का प्रकोप भी झेलना पड़ रहा है। प्राचीन समय में हर घर में गाय पाली जाती थी तथा आज हमनें गांव के महत्व को भुला दिया है। समाज में बेटियों व गाय का अनाधर हो रहा है, जो सबसे भारी भूल है। आकाश से विभिन्न पक्षी आज लुप्त हो गए हैं तथा भूमि की उर्वरा शञ्चित बढ़ाने वाला केंचुआ भी आज नजर नही आ रहा।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि एक देसी गाय से किसान 30 एकड़ भूमि में शून्य लागत प्राकृतिक खेती करके अपनी आमदनी को बढ़ाने के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य को भी सही रख सकता है। उन्होंने कहा कि गुरूकुल कुरूक्षेत्र द्वारा गाय के गोबर व गो-मूत्र से जीवामृत व घनजीवामृत रसायन तैयार किए जाते हैं, जिनके प्रयोग से फसलों में कोई रासायनिक खाद या कीटनाशक डालने की आवश्यकता नही होती। उन्होंने यह रसायन तैयार करने की विधि के संदर्भ में कहा कि प्लास्टिक के 200 लीटर के ड्रम में 180-185 लीटर पानी भरकर इसमें देसी गाय का 8 से 10 किलोग्राम गोबर व इतनी ही मात्रा में गो-मूत्र, डेढ़ से 2 किलोग्राम गुड़ व डेढ़ से 2 किलोग्राम किसी भी दाल का बेसन तथा बड़े पेड़ के नीचे से एक मु_ïी मिट्टïी लेकर इनका घोल तैयार करें। इस ड्राम को छाया में रखें तथा चार दिन सुबह-शाम केवल 5-5 मिनट इसे घड़ी की सुई की दिशा में लकड़ी के डंडे से घुमाएं। ऐसा करने से इस घोल में जीवाणुओं का भंडार तैयार होगा। इस घोल को फसल में पानी देते समय पानी के नाके में छोड़ दें, जिससे सारे खेत में यह घोल फैल जाए। इससे खेती में चमत्कार होगा। इस प्रकार हम एक देसी गाय से एक माह में 30 एकड़ भूमि के लिए ऐसा घोल तैयार कर सकेंगे। इसके प्रयोग से भूमि में मित्र कीटों की संक्चया बढ़ेगी व मित्र कीट गाय के गोबर की गंध से भूमि के ऊपर आकर अपना कार्य कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि केंचुआ किसान का सबसे बड़ा मित्र है। रासायनिक खाद के प्रयोग से यह केंचुआ भूमि में 15 फुट नीचे रह रहा है। एक केंचुआ अपने जीवन काल में 50 हजार अंडे / बच्चे पैदा करता है। भारतीय केंचुआ मिट्टïी खाता है तथा भूमि में 12 से 15 फुट तक छेद बनाता है। इन छेदों से आञ्चसीजन भूमि में जाती है, जिससे वर्षा का जल भूमि में चला जाता है और भूमिगत जल स्तर बढ़ता है। केंचुआ अकाल व बाढ़ को भी रोकने में सहायक है। हिसार व लुधियाना के कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अनुसंधान के अनुसार हर वर्ष भूमिगत जल का स्तर 4 फुट नीचे जा रहा है, यदि ऐसा आगे भी जारी रहा तो भविष्य में हमें पीने का पानी भी उपलद्ब्रध नही होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय देसी गायों की प्रजातियों के दूध को ए-2 का दर्जा मिला है, जो सर्वश्रेष्ठï दूध है। जिस प्रकार जंगल में पेड़-पौधों को बढऩे के लिए किसी प्रकार के खाद की आवश्यकता नही होती, उसी प्रकार प्राकृतिक खेती अपनाने से भूमि को इसी रासायनिक खाद की जरूरत नही रहती। उन्होंने किसानों का आह्वïान किया कि वे शून्य लागत प्राकृतिक खेती का प्रचार-प्रसार भी करें।
उन्होंने कहा कि कुरूक्षेत्र गुरूकुल में 200 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती की जा रही है। इस खेती से मोटे धान की 32 ञ्चिवंटल प्रति एकड़ पैदावार तथा बासमती धान की 12 ञ्चिवंटल प्रति एकड़ की पैदावार हुई है। एक एकड़ में 500 ञ्चिवंटल तक गन्ने का उत्पादन भी हो रहा है। यह खेती अपनाने से किसान वास्तव में अपनी आमदनी को दोगुणा करने में सफल होंगे। गुरूकुल कुरूक्षेत्र में प्राकृतिक खेती का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। इस खेती की खोज महाराष्टï्र के किसान सुभाष पालेकर ने की थी, जिन्होंने कुरूक्षेत्र गुरूकुल में एक शिविर में भाग लेकर किसानों को इस खेती की जानकारी दी थी तथा यह शिविर क्रांतिकारी साबित हुआ। उन्होंने माता-पिता, शिक्षकों व समाज के प्रतिनिधियों का आह्वïान किया कि वे सञ्जय समाज के निर्माण के लिए अपने दायित्व का निर्वहन करें। दूसरे के ह्दय के स्पंदन को अपने ह्दय में महसूस करने वाला व्यञ्चित ही महान होता है। उन्होंने ग्राम पंचायत सीवन की तरफ से राजकीय द्ब्रवायज व कन्या वरिष्ठï माध्यमिक विद्यालयों की 12वीं कक्षा में मैरिट में आने वाले विद्यार्थियों सुरेंद्र कुमार व सुनीता को लैपटॉप भेंट कर सक्वमानित किया तथा पंजाबी की प्राध्यापिका कुलविंद्र कौर व संस्कृत की प्राध्यापिका ज्योति लता को शत-प्रतिशत परिणाम रहने पर 11-11 हजार रुपए की धनराशि से सक्वमानित किया। उन्होंने विभिन्न सामाजिक संस्थाओं व विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टï उपलद्ब्रिध हासिल करने वाले व्यञ्चितयों को भी सक्वमानित किया।
गुहला के विधायक श्री कुलवंत बाजीगर ने कहा कि वे लगातार किसानों के कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। किसानों की सिंचाई हेतू पानी की समस्या का समाधान किया है तथा गांव में बिजली आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए 11 बिजलीघरों का निर्माण जारी है। गुहला में 53 लाख रुपए से मिट्टïी व पानी जांच प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। विधानसभा की 65 सड़कों का निर्माण व सुदृढ़ीकरण किया गया है। गुहला में मुक्चयमंत्री द्वारा साढ़े 13 करोड़ रुपए की राशि राजकीय महिला महाविद्यालय हेतू स्वीकृत की गई, जिसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में है तथा इसी सत्र से मैडिकल व नॉन मैडिकल की कक्षाएं भी शुरू कर दी गई हैं। सीवन में विभिन्न विकास कार्यों पर 31 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई है। पानी की निकासी के कार्य पर साढ़े 21 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। विद्यालय के नए भवन पर भी 3 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च की जा रही है। एक हॉल के निर्माण के अतिरिञ्चत लड़कियों की राजकीय विद्यालय में भी निर्माण कार्य जारी है।
जिला सरपंच एसोसिएशन के अध्यक्ष सरदार गज्जन सिंह ने मुक्चयातिथि व अन्य उपस्थितगण का स्वागत करते हुए कहा कि प्रथम बार सीवन में महामहिम राज्यपाल का आगमन सभी के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने उपस्थितगण से अपील की कि वे शून्य लागत प्राकृतिक खेती के संदेश को घर-घर पहुंचाएं तथा इसे अपनाकर अपने भविष्य को उज्ज्वल व स्वस्थ बनाएं। उन्होंने लोगों का आह्वïान किया कि वे अपने बच्चों का सभी प्रकार के नशों से बचाकर रखें। उन्होंने कहा कि गर्भ में लड़की का कत्ल व भूमिगत जल की बर्बादी से समाज का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। सीवन ग्राम पंचायत के सरपंच के प्रतिनिधि अमरेंद्र सिंह खारा ने सभी अतिथिगण का आभार व्यञ्चत करते हुए कहा कि महामहिम राज्यपाल के संदेश को अपने जीवन में अपनाएं तथा खेती को लाभकारी बनाएं। कार्यक्रम के आयोजकों द्वारा महामहिम राज्यपाल को स्मृति चिन्ह भेंट कर सक्वमानित किया गया तथा विभिन्न संस्थाओं द्वारा महामहिम राज्यपाल का नागरिक अभिनंदन भी किया गया।
इस मौके पर भाजपा की जिला उपाध्यक्ष शैली मुंजाल, नरेश मुंजाल, राधाकृष्ण आर्य, मार्किट कमेटी सीवन के चेयरमैन संजय सैनी, कुमारी संगीता, जितेंद्र कादयान, रतिराम, जितेंद्र चुघ, अशोक, बदन सिंह आर्य, रवि तारावाली, सुरेंद्र ढुल, नेत्रपाल शर्मा, जंगीर सिंह, प्राचार्य सुदर्शन शर्मा, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी रोजी, अशोक भट्टïी, जयभगवान शर्मा, रेनू बाला, ककराला की सरपंच प्रवीण कौर, चतर सिंह, आर्यवीर बलजीत सिंह, निर्मल सिंह सहित विभिन्न संस्थाओं व समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
फोटो सहित

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