किसानों के हित में सुप्रीम फैसला

0
472

दिल्ली, जनक्लब न्यूज

कृषि कानूनों की वैधता और किसान आंदोलन को लेकर दायर याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई. इतना ही नहीं कोर्ट में चीफ जस्टिस ने कई बार कानूनों पर स्टे लगाने की बात कही. उन्होंने कहा कि अगर सरकार कुछ नहीं करती है तो कोर्ट की कानूनों पर रोक लगा देगा. फिलहाल कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है, जिसे दो भागों (आज शाम और कल सुबह) में जारी किया जा सकता.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान किसानों की मौतों का भी जिक्र हुआ. इसपर कोर्ट ने किसान संगठनों के वकीलों से कहा कि वे धरनास्थलों पर जाकर किसानों से खासकर बुजुर्ग, महिलाओं, बच्चों से वापस जाने को कहें

During the hearing today, the Supreme Court strongly reprimanded the Central Government on the petitions filed regarding the legality of the agricultural laws and the peasant movement. Not only this, the Chief Justice in the court several times asked for a stay on the laws. He said that if the government does nothing, then the laws of the court will be banned. At present, the court has reserved the order, which can be issued in two parts (this evening and tomorrow morning).

केंद्र सरकार को फटकार से साथ हुई शुरुआत
सुनवाई की शुरुआत में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि बातचीत चल रही है. अदालत अभी समय दे. इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम इससे बड़े व्यथित हैं कि आप कोई हल नहीं निकाल पा रहे हैं. चीफ जस्टिस ने कहा कि पिछले चार बार में आप एक ही बात कर रहे हैं कि किसानों से बातचीत चल रही है. सीजेआई ने कहा कि हम अभी किसानों के समझौते पर चल रही बातचीत के बारे में जानना चाहते हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि चल रही प्रक्रिया से वे नाखुश हैं. चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर पहले पर्याप्त परामर्श प्रक्रिया अपनाई गई होती तो ऐसी नौबत नहीं आती.

कोर्ट ने कहा कानूनों पर रोक लगा देंगे
चीफ जस्टिस ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि सरकार कुछ नहीं करेगी तो कानूनों पर रोक लगा देंगे. कहा कि जरूरत पड़ी तो कोर्ट खुद इन कानूनों पर रोक लगा देगी. यह भी कहा गया है कि अगर किसान आंदोलन जारी रखना चाहते हैं तो शांतिपूर्ण तरीके से जारी रख सकते हैं. CJI ने फटकार लगाते हुए कहा आप कह रहे हैं कि कोर्ट को इसमें जाना चाहिए इसमें नही जाना चहिए. CJI ने कहा कि यही सुना है कि असली समस्या कानून है. हम आपसे आखिरी बार पूछ रहे हैं कि आप अपने कानून को कुछ समय के लिए रोक क्यों नहीं सकते.
सुप्रीम कोर्ट में CJI ने कहा कि हम सीधा यह सोच रहे हैं कि जबतक कमिटी (जिसको बनाने के बारे में पहले भी कोर्ट ने कहा था) अपनी रिपोर्ट ना दे तब तक हम कृषि कानूनों को होल्ड पर रख दें. CJI से AG को रोकते हुए कहा कि जब हम आपसे कानून की संवैधानिकता के बारे में पूछा रहे हैं तो आप हमको उसके बारे बताइए, कानून के फायदे के बारे में मत बताइए. CJI ने SG को टोकते हुए कहा कि हम समझ नहीं पा रहे हैं कि आप समस्या का हिस्सा है या समाधान का?
किसान आंदोलन की चीफ जस्टिस ने की तारीफ
चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर किसान आंदोलन जारी रखना चाहते हैं तो शांतिपूर्ण तरीके से जारी रख सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलन की तारीफ भी की. कहा कि लंबे आंदोलन में भी कोई हिंसा या हंगामा नहीं हुआ. कोर्ट ने कहा अगर किसान लोगों कि सहूलियत के लिए एक निर्धारित स्थान पर जाना चाहते हैं तो बहुत अच्छा रहेगा. वकील ML शर्मा ने कहा कि किसानों की तरफ से कोई हिंसा नही हो रही है सिर्फ पुलिस ही उनपर आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल कर रही है.

चीफ जस्टिस ने हिंसा की आशंका जताई
CJI ने कहा कि हमें आशंका है कि किसी दिन वहां हिंसा भड़क सकती है. CJI ने कहा कि अगर जाने अनजाने में कुछ भी गलत होता है तो इसके लिए सभी ज़िम्मेदार होंगे. चीफ जस्टिस ने कहा कि हम कानून तोड़ने वालों का संरक्षण नहीं कर रहे या करेंगे. लेकिन प्रदर्शन करने वाले ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं. इसपर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कल हरियाणा में कानून तोड़ा गया है. इसपर किसानों कि ओर से दुष्यन्त दवे ने कहा कि अटॉर्नी गलत बोल रहे हैं, किसानों ने कोई कानून नहीं तोड़ा है. सीजेआई ने कहा कि प्रदर्शन अधिकार है, गांधी जी ने सत्याग्रह किया थाय उपद्रव और हिंसा के बिना लोग पिछले 48 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं.

वकील कॉलिन गोंसॉलविस ने कोर्ट को बताया कि सभी किसान संगठनों ने चार वकीलों को अधिकृत किया है. इसमें दुष्यंत दवे, प्रशांत भूषण, हरविंदर सिंह फुल्का और मैं हूं. सीजेआई ने कहा कि प्रदर्शन में हिंसा नहीं होगी यह जिम्मेदारी चारों वकीलों में कौन लेगा या कौन किसान संगठन यह जिम्मेदारी लेगा.

याचिकाकर्ता के वकील बोले – विवादित हिस्सों पर लगे रोक
याचिकाकर्ता के वकील हरीश सल्वे ने कहा कि सिर्फ कानून के विवादित हिस्सों पर रोक लगाइए. CJI ने कहा कि हम पूरे कानून पर रोक लगाएंगे, इसके बाद भी संगठन चाहें तो आंदोलन जारी रख सकते हैं, लेकिन क्या इसके बाद नागरिकों के लिए रास्ता छोड़ेंगे.

सरकार ने किया कानूनों पर स्टे लगाने का विरोध
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार इस तरह से कानूनों पर स्टे नहीं लगा सकती. अटॉर्नी जनरल ने पूर्व में दिए गए फैसलों को गिनाया और उनके आधार पर कहा कि तीनों कृषि कानून पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए. इसपर चीफ जस्टिस ने हाल में मराठा रिजर्वेशन पर लगाए गए स्टे का जिक्र किया. सीजेआई ने अटॉर्नी से कहा कि जिन फैसलों का हवाला आप दे रहे हैं वो हमें पता हैं. आप कि विस्तृत जानकारी हमें दें, जिनके आधार पर आप कह रहे हैं कि संवैधानिक वैधता पर सुनवाई पूरी होने पर आदेश होना चाहिए.

किसानों के वकील ने कहा – 26 जनवरी को राजपथ पर नहीं चलेंगे ट्रैक्टर
हरियाणा में सीएम की रैली में जो हुआ वह नहीं होना चाहिए था. 26 जनवरी को किसान अपने ट्रैक्टर्स के साथ राजपथ पर आने की प्लानिंग कर रहे हैं. AG ने कहा कि किसान 26 जनवरी को राजपथ पर 2000 ट्रैक्टर दौड़ाने की बात कह रहे हैं. किसान संगठनों के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि किसान ऐसा नहीं करेंग. CJI ने कहा कि हम इससे खुश हैं. फिर AG ने कहा कि SC इनसे इस मामले में हलफनामा ले. फिर दुष्यंत दवे ने कहा कि किसानों को रामलीला मैदान जाने कि इजाजत दी जाए. दुष्यंत दवे ने कहा कि 400 से ज्यादा किसान संगठन यहां पर हैं. किसान संगठनों ने 26 जनवरी की परेड में ट्रैक्टर नहीं चलाने भरोसा दिया.

कानूनों पर रोक लगी तो समझौते में आसानी होगी – कोर्ट
चीफ जस्टिस ने कहा है कि वह किसानों को आंदोलन से नहीं रोकेंगे और कानून को लागू करने पर रोक लगेगी तो समझौते में आसानी होगी. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ यह कह देने से कि ज्यादातर लोग ये सोचते हैं कि कृषि कानूनों से कोई नुकसान नहीं होगा. ऐसा कहने भर से आंदोलन का मुद्दा नहीं सुलझ जाएगा.

वकीलों से कहा – किसानों से जाकर कहो चीफ जस्टिस लौटने को कह रहे हैं
सीजेआई ने कहा कि हर किसी को 26 जनवरी को दिल्ली आने का अधिकार है. लेकिन हम हिंसा और कानून व्यवस्था को हाथ में नहीं लेने दे सकते. ऐसे में हम कहेंगे कि हम आदेश दे रहे हैं कि आप लौट जाएं. सीजेआई ने किसान संगठनों के वकीलों से कहा कि आप किसानों से जाकर कहें कि सीजेआई वापस लौटने को कह रहे हैं. सीजेआई ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में आप प्रदर्शन कर रहे हैं. यह ख्याल रखा जाना जरूरी है कि सभी सुरक्षित रहें. सीजेआई ने कहा कि हमें उम्मीद है कि किसान सुप्रीम कोर्ट की बात मानेंगे‌.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में बनाई जाएगी कमिटी
किसानों के मुद्दे को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समिति सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में बनायी जाएगी. इसपर सभी पक्षकारों से नाम सुझाने को कहा गया है. एसजी ने कहा कि हम कल नाम अदालत को सौंपेंगे. अटॉर्नी जनरल ने फिर कहा कि तीनों कानूनों पर रोक लगाना उचित नहीं होगा. इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि सीजेआई ने कहा कि हम कानून खत्म नहीं कर रहे हैं. मिली जानकारी के मुताबिक, किसान यूनियनों ने पूर्व चीफ जस्टिस आर एम लोधा का नाम कमिटी के प्रमुख के रूप में सुझाया है. कमिटी कानून की संवैधानिकता पर विचार करेगी. फिलहाल कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. आज शाम को या फिर कल फैसला दिया जा सकता है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here