किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा देने के उद्देश्य से ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल लॉन्च किया

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कैथल, 9 जुलाई ( कृष्ण गर्ग )
प्रदेश सरकार द्वारा कृषि को जोखिम मुक्त बनाकर लाभकारी बनाने व किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा देने के उद्देश्य से ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल लॉन्च किया है। इस पोर्टल के माध्यम से किसान आगामी 31 जुलाई तक अपनी बोई फसल व खाली खेत का ब्यौरा 222.द्घड्डह्यड्डद्यद्धह्म्4.द्बठ्ठ पोर्टल पर दे सकता है।
उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने जिला के किसानों का आह्वान किया है कि वे सरकार द्वारा लॉन्च किए गए ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर अपनी फसलों का पूरा ब्यौरा निर्धारित अवधि तक अवश्य दें ताकि उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा ऐसे प्रबंध किए गए हैं कि जैसे ही इस पोर्टल पर कोई किसान अपनी फसल का पंजीकरण करेगा तो एसएमएस के माध्यम से उसके पास संदेश जाएगा। अगर काश्तकार पंजीकरण करता है तो भी भू-मालिक के पास इसकी जानकारी जाएगी। वर्तमान में गेहूं व धान की खरीद केन्द्र सरकार द्वारा की जाती है, परंतु सरसों, बाजरा, सूरजमुखी की खरीद प्रदेश सरकार अपनी एजेंसियों से करवाती है। इस बार मक्का की खरीद भी प्रदेश सरकार करवाएगी। किसान की हर उपज का एक-एक दाना खरीदा जाएगा और किसान को किसी भी प्रकार की कठिनाई नही आने दी जाएगी। उन्हें अपनी फसल बेचने में कोई असुविधा न हो और उनके लिए खेती लाभ का व्यवसाय बन सके। इस पोर्टल पर किसानों की कल्याण के लिए कृषि एवं किसान कल्याण, राजस्व, खाद्य एवं आपूर्ति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग मिलकर कार्य करेंगे। भू-मलिक के साथ असली काश्तकार भी अपनी फसल का ब्यौरा इस पोर्टल पर डाल सकता है और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में सरकार की ओर से दी जाने वाली नुकसान की भरपाई का मुआवजा भी उसे मिल सकेगा। इसी प्रकार किसान व आढती के बीच किसी प्रकार का विवाद न हो, इसके लिए भी किसान अपनी मर्जी से अपनी उपज बिना आढती के सरकारी खरीद एजेंसियों के माध्यम से बेच सकेगा और पैसा सीधा उसके खाते में जाएगा।
उन्होंने बताया कि 1 अगस्त से इस पोर्टल पर कृषि और राजस्व विभाग मिलकर प्रविष्टियां दर्ज करेंगे और दोनों विभागों के कर्मचारी खेत में जाकर ई-गिरदावरी करेंगे, जो जीपीएस के साथ लिंक होगी। इसके पश्चात सरकार द्वारा फसल पकने पर सैटेलाइट के माध्यम से फोटोग्राफी करने का प्रावधान किया गया है। यदि फिर भी किसी किसान की कोई समस्या रह जाती है तो जिला प्रशासन द्वारा विशेष कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पोर्टल पर पंजीकरण के लिए किसान को प्रति एकड़ 10 रुपये तथा अधिकतम 50 रुपये दिए जाएंगे तथा इसके अलावा सांझा सेवा केन्द्र पर की गई हर प्रविष्टि के लिए वीएलई को पांच रुपये प्रति पंजीकरण की दर से राशि भी दी जाएगी।

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