किसानों ने प्रदेश सरकार को जमकर कोसा

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कैथल, 27 जनवरी (कृष्ण गर्ग)
रविवार को पाई की अनाज मंडी में किसानों की एक विशाल जन सभा हुई, जिसमें किसानों ने प्रदेश सरकार को जमकर कोसा। जनसभा प्रदेश भर की किसान यूनियनों व किसानों ने भाग लिया। जनसभा की अध्यक्षता किसान यूनियन के राष्ट्रीय सलाहकार अजीत सिंह हाबडी ने की और मंच संचालक वीरेंन्द्र पाई ने किया। जनसभा की शुरूआत पाई के कली राम के शहीदी दिवस पर उनको पुष्प अर्पित करते हुये की। याद रहे की कली राम 27 जनवरी 1993 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल के समान्तर जींद में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुये ह्रदय गति रुकने से शहीद हो गये थे। जनसभा को सम्बोधित करते हुये कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आज किसान बर्बादी के कंगार पर आ खड़ा है। कोई भी किसान ऐसा नही है जिसके सिर पर कर्जा न हो। मंडियों में किसानों की फसलें लुटी जाती है तो बैंकों में किसानों के कर्ज वाले खातों में बीमा योजना के नाम पर लुटा जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश व केन्द्र में विभिन्न पार्टियों की सरकार आती व जाती रहती है। चुनाव के समय सभी किसानों को विभिन्न प्रकार के लालच देकर वोट ले लेते है, परन्तु बाद में किसानों को विकास के नाम पर झुन्झंना पकड़ा दिया जाता है और अपने किये गये सभी वादे भूल जाते है। उन्होंने कहा कि कई वर्ष पूर्व किसानों की दुर्गति देखते हुये एक कमेटी का गठन किया गया था, जिसका नाम स्वामीनाथ कमेटी थी। उस कमेटी से सरकार को किसान बचाने के लिये एक रिपोर्ट पेश की थी, परन्तु अफसोस इस बात का है कि इस स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू नही किया जा रहा। गत चुनाव में भी भाजपा द्वारा किसानों की फसलों के दाम इस रिपोर्ट के आधार पर लागू करने का वायदा किया था, परन्तु सरकार सता में आने के बाद इसको भूल गई। उन्होंने जनसभा में किसानों के हित के लिये कुछ मांगे भी रखी। जनसभा में भजनी ईश्वर सिंह छात्तर भी किसान कौम पर अपने भजन सुनाकर समा बांध दिया। इस अवसर पर किसान समिति पाई से बलवान, करतारा, जगदीश, ईश्वर रोड़, धीरा, सत्ता, मालाराम, जय कुमार शेख पुरा, भूरा राम पबनावा, जियालाल, मामराज पबनावा, सुखपाल कुलतारन, सतपाल दिलोवली, श्रीराम गोहना, पाला राम संगरौली, सुभाष पिलनी, सुरेश दहिया पानीपत, सुखा राम करनाल,सेवा सिंह आर्य आदि सेकड़ों किसान उपस्थित थे।
किसानों ने ये रही मुख्य मांगे:-
1. सरकार किसानों को कर्ज मुक्त करे।
2. सरकार लागत मूल्य पर लाभकारी मूल्य दे।
3. प्राईवेट बैंकों द्वारा किसानों से फसल बीमा योजना के तहत करोड़ों रुपया एकत्र करने के उपरांत भी किसानों को उनकी फसलों का बीमा नही मिला। सरकार यह बीमा जल्दी दिलवाये।
4. 50 वर्ष की उम्र से ऊपर के किसानों को सरकार अपने कर्मचारियों की पेंशन के समान पेंशन दे।
5. सरकार स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करे।
6. किसानों को नुकसान से बचाने के लिये सरकार अपने खर्चे पर गऊशाला बनाये और गऊ चारे के लिये ग्रांट दी जाये।
7. हर किसान का बुढ़ापे में बीमार किसान का इलाज सरकार अपने खर्चे पर करे।
8. जो किसान ठेके पर जमीन लेकर खेती करता है तो ऐसे में सरकार उस किसान को मुआवजा व सब सी डी जे फार्म पर दे।
फोटो- 10

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