कुरूक्षेत्र में भगवानकृष्ण द्वारा महाभारत युद्ध के दौरान मोह ग्रस्त अर्जुन को गीता का अमर संदेश दिया था

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कैथल, 17 दिसक्वबर (कृष्ण गर्ग)
उपायुञ्चत धर्मवीर सिंह ने कहा कि कुरूक्षेत्र में भगवानकृष्ण द्वारा महाभारत युद्ध के दौरान मोह ग्रस्त अर्जुन को गीता का अमर संदेश दिया था, जिसके बाद अर्जुन अपने रिश्तेदारों व परिवार के सदस्यों से युद्ध करने को तैयार हुए थे। गीता का यह अमर संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना महाभारत युद्ध के दौरान था।
श्री धर्मवीर सिंह आरकेएसडी कॉलेज हॉल में गीता जयंती महोत्सव के उपलक्ष में वर्तमान समय में गीता की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित संगोष्ठिï में उपस्थितगण को बतौर मुक्चयातिथि संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने संगोष्ठिï का दीप प्रज्ज्वलन से विधिवत शुभारंभ किया तथा राजकुमार शर्मा ने गीता आरती की। उपायुञ्चत धर्मवीर सिंह ने कहा कि गीता के कर्म के संदेश पर चलते हुए वर्तमान समाज की सभी समस्याओं का समाधान संभव है। इस संदेश को हम घर-घर तक पहुंचाए, तभी गीता जयंती महोत्सव का आयोजन सार्थक होगा। उन्होंने कहा कि भगवानकृष्ण ने गीता के उपदेश में कहा है कि मनुष्य को फल की ईच्छा किए बिना अपना कर्म करना चाहिए।कृष्ण ने अपने संदेश में कहा है कि जब-जब श्रृष्टि में धर्म की हानि तथा अधर्म की वृद्धि होती है, तो वे पाप कर्म के विनाश एवं धर्म की स्थापना के लिए युग-युग में अपनी योग माया के माध्यम से प्रकट होते हैं। आत्मा की अजरता व अमरता के संदेश के साथ-साथ वर्तमान में जीने तथा बीते हुए कल पर विलाप न करते हुए निस्वार्थ भाव से कर्म करने में हमें लीन रहना चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन की ओर से तीनों वञ्चताओं को प्रशस्ति पत्र व शॉल भेंटकर सक्वमानित किया।
संगोष्ठिï को संबोधित करते हुए कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष ललित कुमार गौड़ ने गीता की वैश्विक दृष्टिï विषय पर कहा कि आत्मा और परमात्मा दोनों एक हैं तथा हम सभी परमात्मा का अंश हैं। हमें स्वयं के स्वरूप को समझने की जरूरत है। बुजुर्गों के आचरण का हमें अनुसरण करना चाहिए। सूर्य पूजन के बारे में उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक भी यह मानते हैं कि सूर्य को जल देते समय जल की धारा से सूर्य के दर्शन करने से आंखों की रोशनी तेज होती है।
पेहवा स्थित डीएवी कॉलेज के प्राचार्य कामदेव झा ने वर्तमान परिप्रेक्ष में गीता की प्रासंगिकता विषय पर बोलते हुए कहा कि ऐसी मान्यता है कि 48 कोस की परिधि में लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवानकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि जो व्यञ्चित जिस रूप में भगवान को देखता है, भगवान उसी रूप में नजर आते हैं। संसार में ज्ञान से बढ़कर कुछ नही है। हमारे संत महात्माओं ने चिंतन के बाद अध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया है। उन्होंने भगवान वाल्मीकि, जटायु व लक्ष्मण के उच्च चरित्र का भी उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने गुरू-शिष्य परंपरा का जिक्र करते हुए कहा किकृष्ण से बड़ा कोई गुरू नही है।
कैथल के प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. बीबी भारद्वाज ने वर्तमान युग में गीता के महत्व विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि विश्व मेंमद्भगवद् गीता जैसी अन्य कोई धार्मिक पुस्तक नही है। विश्व की अन्य प्रसिद्ध रचनाओं देवदास व हैल्मेट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गीता सहित इन तीनों रचनाओं के नायक असमंजस की स्थिति में हैं। भगवानकृष्ण द्वारा इस असमंजस की स्थिति से बाहर निकालने के लिए दिए गए गीता के संदेश के कारण ही अर्जुन अपने लक्ष्य की प्राप्ति में सफल होते हैं, जबकि अन्य दोनों रचनाओं के नायक मृत्यु को प्राप्त होते हैं।
इस मौके पर अतिरिञ्चत उपायुञ्चत सतबीर सिंह कुंडु, नगराधीश विजेंद्र हुड्डïा, डा. भीम राव अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य ऋषिपाल बेदी, आरकेएसडी कॉलेज के प्राचार्य संजय कुमार गोयल, डा. बीडी थापर, डा. ओपी गुप्ता, सरोज चौधरी, उप जिला शिक्षा अधिकारी सुदेश सिवाच, कैथल के खंड शिक्षा अधिकारी रति राम शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यञ्चित मौजूद रहे।

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