कैथल के आढ़तियों ने गेहूं के सीजन में होने वाली अवैध वसूली तथा समस्याओं से अवगत करवाने के लिये मुख्य मंत्री सहित अनेक उच्च अधिकारियों को लिखा पत्र

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कैथल, 16 मार्च कृष्ण गर्ग
कैथल के आढ़तियों ने गेहूं के सीजन में होने वाली अवैध वसूली तथा समस्याओं से अवगत करवाने के लिये मुख्य मंत्री सहित अनेक उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है। मंडी के आढ़ती राम कुमार, कृष्ण गर्ग, राम नारायण, सुरेंद्र, राज पाल चहल, हरि चंद, रामफल, सुरेश चौधरी आदि ने बताया कि प्रति वर्ष गेहूं के सीजन में लदान व शोरटेज के नाम पर कई करोड़ों की अवैध वसूली होती है, जो आढ़तियों के साथ सरासर नाईसाफी है। इससे अवैध वसूली से बचने के लिये उन्होंने मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, ए सी एस खाद्य एवं फूड सप्लाई चंडीगढ़, सचिव पंजाब एण्ड हरियाणा, मुख्य गृह सचिव हरियाणा आदि को पत्र के द्वारा लिखा है।
उन्होंने बताया कि खरीद एजेंसियां एक ही ठेकेदार को उठान का टेंडर देती है और उसके पास वाहन भी कम होते है। दूसरे के वाहन एक ही नम्बर के सभी खरीद एजेंसियों में दिये जाते है। जिस कारण से वाहन कम होने के कारण खरी की हुई गेहूं समय पर उठ नही पाती और गर्मी के कारण सुख जाने के चलते शोरटेज हो जाती है। जिस भरपाई खरीद एजेंसियां आढ़तियों से करती है। जो सरासर गलत है। किसानों से उनकी फसल सरकार या मार्केट कमेटी के द्वारा एस एम एस भेज कर मंगवाई जाती है, जबकि इनको यह नही पता होती कि इस किसान की फसल तैयार है या नही। आढ़ती के माध्यम से पूछ कर ही एस एम एस भेज कर किसानों की फसल मंगवाई जाये। उन्होंने बताया कि गेटपास काटने में भी ना इंसाफी होती है। मंडी के सभी सीवरेज बंद रहते है और किसानों की फसल पानी में तैरती रहती है। उन्होंने बताया कि मंडी में मार्केट कमेटी व सरकार के द्वारा किसानों व आढ़तियों की फसल चोरी होने से बचाने के लिये चौकीदार की व्यवस्था नही है। इसके अलावा मंडी में अनेक समस्यायें है।
आढ़तियों द्वारा बताई गई समस्यायें व निदान –

  1. गेहूं के सीजन में लदान के समय वाहन चालक करोडा़ें रुपये मंडी के आढ़तियों से अवैध वसूली के लेते है। यह समस्या एक ही ट्रांसपोर्टर को ठेका देने के कारण होता है। कृपया इस समस्या के लिये मंडी में से जो खरीद एजेंसियां खरीद करे, तो लदाई का ठेका सभी एजेंसियों का अलग- अलग हो और उनसे ट्रकों के नम्बर भी चैक करे की वे अलग अलग है कि नही। यदि लदान कम हो तो टै्रक्टर- ट्राली आदि भी प्रयोग किया जाये।
  2. मंडी में से खरीद एजेंसियों के द्वारा खरीद किया गया गेहूं तीन दिन के अंदर- अंदर उठान हो। उसके बाद उठान होने पर आढ़ती की शोरटेज, आग लगने, चोरी होने तथा वर्षा में खराब होने की कोई जिम्मेवारी न हो।
  3. खरीद एजेंसियों के तुलाई करने वाले कांटों की हर सप्ताह चैकिेंग हो।
  4. खरीद एजेसियों द्वारा खरीद की गई फसल के बिल आढ़त, मजदूरी समेत लिये जाये और भुगतान भी उसी प्रकार से हो।
  5. कमेटी के द्वारा किसानों व आढ़तियों की फसल चोरी होने से रोकने के लिये सभी गेटों पर चौंकीदार हो। कमेटी का मंडी से प्रति वर्ष अरबों की आमदन होने के बाद भी अभी तक किसी भी चौकीदार को नही रखा गया।
    6.मंडी नीची है और आसपास मंडी के चारों और उंचा है। बाहर के सीवरेज का खासकर रामनगर के सीवरेज मंडी से जोड़े हुये है। जिस कारण से सीवरेज ओवर फ्लो हो जाते है। मार्केट कमेटी के सामने तो बिना बरसात के भी सडक़ तालाब बनी रही है। कई साल से आढ़ती इस सीवर को अलग करके इस समस्या से निजात की गुहार लगा चुके है, परन्तु जिला प्रशासन कुम्भकरणी नींद सोया पड़ा है।
  6. अनाज मंडी बडी है, जिस कारण से यहां पर खरीद हर रोज लाईनों के हिसाब से प्रत्येक खरीद एजेंसी करे और आढ़तियों को गेहूं भरने के लिये बारदाना समय पर दिया जाये।
    8.किसानों की फसल मंडी में आढ़तियों के द्वारा मंगवाई जाये, यदि टोकन के हिसाब से सरकार उनकी गेहूं की फसल मंगवाती है तो किसान अधिक नमी वाली लेकर एक दम आ जायेगे और मंडी के अंदर सुखाने पर जगह की कमी हो जायेगी।
  7. किसानों की फसल मंगवाने के लिये एस एम एस की व्यवस्था आढ़तियों के द्वारा भेजने की करी जाये।

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