खट्टर का हुआ अब तक का सबसे बड़ा विरोध किसान आंदोलन बना जन आंदोलन….

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खट्टर का हुआ  अब तक का सबसे बड़ा विरोध किसान आंदोलन बना जन आंदोलन….
अंबाला। किसान आंदोलन को लेकर मोदी सरकार के साथ-साथ प्रदेश की बीजेपी जेजेपी सरकार को भी बड़े जन आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जहां दिल्ली के चारों तरफ पिछले 27 दिन से चल रहा है वहीं प्रदेश के हर जिले में सत्ता पक्ष के नेताओं को किसानों के विरोध को झेलना पड़ रहा है। मंगलवार को  अंबाला में नगर निगम चुनाव के प्रचार में शामिल होने के लिए पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को सबसे बड़े विरोध का सामना करना पड़ा। हजारों किसानों और आम लोगों ने कृषि कानूनों के खिलाफ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ जोरदार मार्च निकालते हुए उनके खिलाफ नारेबाजी की। हजारों लोगों की भागीदारी से यह लगा कि किसान आंदोलन जन आंदोलन बन गया है। यह प्रदेश के गठबंधन सरकार के लिए भारी सिरदर्दी बन गया है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ निकाले गए रोष मार्च में लोगों की भारी भागीदारी ने यह भी बता दिया कि जनता की नाराजगी लगातार बढ़ रही है और जो सत्ता पक्ष के लिए शुभ संकेत नहीं है।उधर बीते  दिन नारनौल में  किसानों द्वारा काले झंडे दिखाए जाने के बाद मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा था कि उन्हें पता था दो-चार नमूने जरूर आएंगे लेकिन किसानों ने  अंबाला में करारा जवाब देते हुए बता दिया कि 2-4 नहीं बल्कि हजारों की संख्या में किसान कृषि कानूनों के खिलाफ खड़े हैं जिसके चलते किसानों ने रोका मुख्यमंत्री खट्टर का काफिला पुलिसकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद मुख्यमंत्री के काफिले को किसानों से बचा कर निकाला। हकीकत यह है कि प्रदेश के 99 फ़ीसदी किसान कृषि कानूनों के खिलाफ खड़े हैं और वे इन्हें रद्द करने की मांग करते हैं। अगर मुख्यमंत्री को किसानों के आंदोलन में शामिल होने की संख्या पर कोई शक है तो उन्हें अंबाला के आज के विरोध प्रदर्शन से जान लेना चाहिए कि एक एक किसान कृषि कानूनों के खिलाफ खड़ा है

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