खाली सिलेंडर व चूल्हे तुड़ी वाले कमरों में पड़े है या कुंटीयों पर टंगे,

0
113

कैथल, 01 मार्च ( कृष्ण गर्ग)
भाजपा सरकार के द्वारा बी पी एल धारकों की महिलाओं की आंखें धुयें से बचाने के लिये चलाई गई उज्जवला योजना अब केवल कागजों तक सिमट कर रह गई है। जिस कारण से आर्थिक स्थिति के चलते महिलाओं का दुबारा से अपना भोजन उपलों तथा लकड़ी की आग में बना पड़ रहा है और अपनी आंखें धुयें में खराब करनी पड़ रही है और गैस के खाली सिलेंडर व चूल्हे तुड़ी वाले कमरों में पड़े है या कुंटीयों पर टंग गये है।
गृहणी अंगुरी देवी, सोमी देवी, धन्नो देवी, मुकेश देवी, सीमा, माया, बिमला, समिता रानी, पुजा, रीना देवी तथा खुशबू रानी ने बताया कि सरकार के द्वारा बी पी एल परिवारों की महिलाओं की आंखें धुयें से बचाने के लिये उज्जवला योजना के तहत गैस के सिलेंडर के कैन्कशन दिये थे। उस समय उनसे सिलेंडर व गैस का चूल्हा 1600 रुपये लेकर दिया गया था। उस समय सिलेंडर के दाम लगभग 450 के आसपास थे। उनको लग रहा था कि यदि ये दाम यही रहे तो वे ऐसे कैसे करके सिलेंडर समाप्त होने पर भरवाते रहेंगे, परन्तु अब दाम आसमान छूने लग गये है। इतने ज्यादा दाम देकर सिलेंडर भरवाना अब उनके वंश में नही है। अब दुबारा से उनको अपना खाना बनाने में गोबर के उपलों तथा लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। जिससे उनकी धुयें से छुटकारा पाने की आस धूमिल हो गई। सिलेंडर न भरवाने की सुरत में अब महिलाओं ने ये सिलेंडर इधर- उधर तुडी के कमरों में रख दिया है। कई महिलाओं ने कुटियों पर टांग दिया तो कइयों ने टांढ़ पर रख दिये है। अब उनको लगने लगा है कि उस समय सरकार के बहकावे में आकर उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है। जिस कारण से उनके 1600 रुपये बेकार में चले गये है। सरकार को चाहिये कि उनसे लिये गये पैसे या तो वापस करे या सस्ते दामों में सिलेंडर दे।
फोटो- 1. उपलों व लकड़ी के धुयें में खाना बनाती महिलायें।
2. तुड़ी वालों में पड़े तथा कुंटियों पर टंगे गैस के खाली सिलेंडर।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here