गिरे हुये झोपड़ी नुमा खंडहर मकान में रहने के बाद भी आर्थिक सहायता नही

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कैथल, 3 अक्तूबर(कृष्ण गर्ग)
गिरे हुये झोपड़ी नुमा खंडहर मकान में रहने के बाद भी पाई के एक गरीब परिवार को न तो पहले कालोनी में मकान मिला और न ही प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत कोई आर्थिक सहायता। आर्थिक मदद के लिये इस युवक ने देश के प्रधानमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री से पत्र के द्वारा गुहार लगाई है। यह कहना है गुरनाम सपुत्र चंद्रभान राम सहा पट्टी दरवाजा पाई का। उन्होंने बताया कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि जीवन यापन करना बहुत मुश्किल हो रहा है। उसका गरीब परिवार केवल मजदूरी पर निर्भर है। एक समय के भोजन की व्यवस्था होने के बाद दूसरे समय के भोजन की व्यवस्था करने की उनको चिंता हो जाती है। इस स्थिति में वह अपने पुराने मकान की मरम्मत नही करवा सकता और न ही गिराकर दुबारा से बनवा सकता। उसका मकान कच्चा है और प्रति वर्ष गिर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश व केंद्र की सरकारें प्रति वर्ष विभिन्न प्रकार की योजनायें चलाती है। ऐसी कोई योजना नही होगी जिसमें उनकी आर्थिक सहायता के लिये उसने हिस्सा न लिया हो, परन्तु अफसोस इस बात का है कि उसको सरकार की किसी भी योजना का फायदा नही मिला। उन्होंने बताया कि जब गरीब परिवारों के लिये प्रदेश सरकार के द्वारा कालोनियां काटी जा रही थी, तो उस समय भी वह उससे वंचित रह गया और लिस्ट से उसका नाम काट दिया गया। अब उसने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपने सभी कागजात पूरे करके जमा करवाये थे, परन्तु इसमें से भी उसका नाम गायब हो गया। अब थक हार कर उसने अपनी आर्थिक सहायता के लिये प्रधान मंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है कि क्या गरीब होना जुर्म है। उससे अच्छे परिवारों को योजनाओं का फायदा मिल रहा है और उसको नही।
फोटो-पी02- दस सदस्यों का परिवार इस झोपड़ी वाले खंडहर मकान में रह रहा।

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