देश के बहुचर्चित मनोज बबली हत्याकांड में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डाली गई तीनों याचिकाओं में से दो को खारिज करते हुये पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा,

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कैथल, 9 जनवरी (कृष्ण गर्ग)
देश के बहुचर्चित मनोज बबली हत्याकांड में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डाली गई तीनों याचिकाओं में से दो को खारिज करते हुये पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जबकि मनोज की मां चंद्रवती व बहन सीमा के द्वारा डाली गई याचिका में से दंड की राशि एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख कर दी है। विदित रहे की जिले के गांव करोडा में एक ही गांव व गोत्र में विवाह करने पर मौत के घाट उतार दिया गया था। जिस पर करनाल की कोर्ट के द्वारा लड़की के परिवार जनो में पांच को फांसी, एक को उम्रकैद तथा ड्राईवर को सात साल की सजा सुनाई थी। बाद में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पांच को फांसी की सजा को बदल कर एक को बरी तथा चार को उम्रकैद की सजा करने, एक की उम्रकैद की सजा से बरी करने व ड्राईवर को पहले वाली सात साल की सजा को बरकरार रखा था। जिस पर सरकार के द्वारा करनाल कोर्ट के निर्णय को ज्यों का त्यों रखने, आरोपियों के द्वारा उम्रकैद को कम करने तथा मनोज के परिवार के सदस्यों ने करनाल की सजा को बरकरार रखने और मुआवजा राशि एक लाख से बढ़ा कर पांच लाख करने की तीन याचिकायें सुप्रीम कोर्ट में डाली गई थी। मनोज के परिवार की तरफ से किये गये वकील लाल बहादुर खोवाल ने बाया कि माननीय कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को ज्यों का त्यों बरकरार रखा, परन्तु मनोज के परिवार की ओर से डाली गई याचिका में मुआवजा की राशि मंजूर करते हुये एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख कर दी गई है।
यह था मामला
1. 4 अप्रैल 2007 को प्रेमी जोड़ा घर से फरार हुआ।
2. 7 अप्रैल 2007 को हाई कोर्ट चंडीगढ़ में प्रेम विवाह किया।
3. 15 जून को कैथल में जज वी पी की कोर्ट में बबली की ओर से अपने बचाव के लिये याचिका लगाई गई और बाद में इसी दिन उनकी हत्या की गई।
4. 20 जून को करनाल के बुटाना थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया।
5. 23 जून को दो के शव नहर से मिले।
6. 30 मार्च 2010 को करनाल की वाणी गोपाल शर्मा की अदालत ने आरोपी मामा बारू राम, ममेरे भाई गुरदेव, सतीश, भाई सुरेश, चाचा राजेन्द्र को फांसी, दादा गंगाराम को उम्रकैद तथा ड्राईवर मनदीप को सात साल कैद की सजा सुनाई।
7. 11 मार्च 2011 को हाईकोर्ट के द्वारा पांच की फांसी की सजा में से मामा बारू राम, भाई सुरेश, चाचा राजेंद्र व ममेरे भाई गुरदेव को फांसी से उम्रकैद, ममेरे भाई सतीश को फांसी से बरी, दादा गंगाराम करोड़ा को उम्रकैद से बरी किया तथा ड्राईवर मनदीप की सात साल की सजा बरकरार रखी। मुआवजा राशि एक लाख रुपये देने की सजा भी सुनाई गई।

अब डालेंगे पून: विचार याचिका
इस बारे में वरिष्ठ वकील लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि मनोज की बहन सीमा ने उनको पुन: विचार याचिका डालने के लिये कहा है। जिसके लिये उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है।

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