न तो सरकार को और न ही हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों को कई हजारों लोगों की रोजी रोटी पर जरा सा रहम नही आया i बोर्ड के नियमों को ताक पर अब भी जारी है रिश्वत का खेल

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कैथल, 7 जून (कृष्ण गर्ग)
न तो सरकार को और न ही हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों को कई हजारों लोगों की रोजी रोटी पर जरा सा रहम नही आया, बल्कि अब भी भ्रष्टाचार की ओर इनका ध्यान है। आढ़ती मुख्यमंत्री से लेकर कई नेताओं के पास अपना रोजगार बचाने के लिये रहम की अपील कर चुके है, जिसके चलते कैथल के सैकड़ों आढ़तियों को हाई कोर्ट की शरण में जाना पड़ता। यदि हाईकोर्ट मार्केटिंग बोर्ड के नियम लागू करता है तो पूरे प्रदेश में लगभग लाखों लोग बेरोजगार हो जायेंगे।
मामला कैथल की अनाज मंडियों के आढ़तियों के आढ़त के लाइसेंस रिन्यू न करने को लेकर है। मार्केटिंग बोर्ड ने नियम बनाया हुआ है कि उनके द्वारा मंडी के अंदर अलाट की गई 20 फूट चौड़ी तथा 85 फूट लम्बी दुकान पर केवल एक लाइसेंस बनाया जा सकता है। कैथल की नई अनाज मंडी में लगभग 137 दुकानें है, जिनमें से 5 दुकानों के प्लाटों पर मार्केट कमेटी बनी हुई है। दो पर सोसाइटी है। ऐसे में केवल लगभग 130 आढ़ती लाइसेंस लेकर अपना कार्य कर सकते है। उधर पुरानी मंडी में लगभग 90 दुकानें है और उन पर केवल 90 आढ़ती ही कार्य कर सकते है। इस प्रकार केवल 220 के लगभग आढ़ती ही कार्य कर सकते है। परन्तु दो मंडियों में इन आढ़तियों की संख्या बढ़ती गई। इस समय लगभग 850 के लगभग आढ़ती कार्य कर रहे है। यह मामला कैथल की अनाज मंडियों का ही नही हैँ, अपितु प्रदेश की अनाज मंडियों का है। लाइसेंस अधिक संख्या में देखते हुये बोर्ड के द्वारा 2012 में नियम बनाया गया कि यदि कोई ब्लड रिलेशन में आढ़त का कार्य करना चाहता है तो वह एक दुकान पर दो लाइसेंस जारी किये जा सकते है। यह संख्या इसी का फायदा उठाते हुये बढ़ गये है। कुछ आढ़ती आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनको अपनी दुकानें बेच कर अपना कार्य सुचारु रूप से जार रखा। कुछ के द्वारा अपनी दुकानों का आधा हिस्सा बेच कर अपना कार्य जारी रखा। मंडी के अंदर बुथ भी बनाये हुये है, जिन पर केवल चाय, कपड़ा तथा करियाना आदि जैसी दुकानें खोली जा सकती है, परन्तु मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों ने इनको भी नही बक्शा और रिश्वत के बल पर इन पर भी लाइसेंस जारी कर दिये गये।
वर्ष 2012 में कैथल की अनाज मंडी में सचिव के तौर पर आशा रानी आई और उसने आढ़तियों के गुप्त रूप से कहे अनुसार लाइसेंस रिन्यू करने के नाम पर मोटी रिश्वत की मांग की। जो आढ़तियों ने देने से इंकार कर दिया। जिसके परिणाम स्वरूप उस समय मंडी में जब भी लाइसेंस रिन्यू कामना आया तो इनको कभी टुकड़ों में, तो कभी सालाना देरी से अस्थाई रूप से रिन्यू किया जाने लगा। जो लाइसेंस आधी दुकान पर बना हुआ है, बूथों में बना हुआ है, मंडी से बाहर की दुकानों पर बना हुआ है या एक दुकान पर कई- कई लाइसेंस बने हुये है, सभी को अस्थाई बताया गया। अब कमेटी के द्वारा सभी नियमों पर ताक पर रख इनमें से कुछ को रिन्यू कर दिया गया और इनमें से केवल लगभग 342 लाइसेंस रिन्यू करने से जवाब दे दिया गया।
अब इनमें से जवाब दिये में लगभग 201 आढ़तियों ने हाईकोर्ट में जाकर शरण ली है। जिस पर माननीय कोर्ट ने इनकी प्रार्थना स्वीकार करते हुये प्रदेश सरकार, मार्केटिंग बोर्ड व कैथल कमेटी को नोटिस भी जारी किया। कोर्ट ने इनको पहले 3 जुन और 28 जून की तारीख रखी है। जबकि लगभग 141 आढ़ती कोर्ट की शरण में नही गये। जिस कारण से कमेटी के नियम अनुसार उनके लाइसेंस अपने आप रद्द हाक गये है। इधर कमेटी के अधिकारी कह रहे है कि सभी के लाइसेंस जो अस्थाई थे, वे रद्द हो गये है। परन्तु ऐसा नही है। कोर्ट में जाने वाले आढ़तियों को अस्थाई स्टे मिला हुआ है। जिसका फैसला 28 जून को हो जायेगा कि वह पक्का होगा या खारिज होगा।

बोर्ड के नियमों को ताक पर अब भी जारी है रिश्वत का खेल।
इन लाइसेंस को अस्थाई बनाना 2017 में शुरू हो गया था, परन्तु मंडी में दुकान न हो के चलते उसके बाद भी कई दर्जन लाइसेंस जारी किये गये। इतना ही नही कुछ टूल दारों के लाइसेंस, जो आधी दुकानों पर बने हुये है, मंडी से बाहर है या अन्य किस्म के है, उनके लाइसेंस रिन्यू कर दिये गये है। पुरानी मंडी में तो ऐसी दर्जनों दुकानें है, जिन पर आधी पर दाल, घी, चीनी या करियाणा जैसी दुकानें है और आधी पर आढ़त के लाइसेंस बने हुये है। जबकि आधी ऐसी दुकानों को अस्थाई में लेकर रोक लगाई हुई है। ऐसे ही नगर परिषद की कुछ दुकानों पर लाइसेंस है और कुछ पर रोक। मंडी के आढ़तियों का यह भी कहना है कि अब भी ऐसे लाइसेंस बनाये जा रहे है। जिनका पता कुछ है और कार्य कही और हो रहा है। कमेटी के अधिकारी 10 गुना 85 की दुकान की मांग कर रहे है परन्तु बोर्ड के नियम अनुसार केवल ब्लड रिलैशन में ऐसे लाइसेंस जारी हो सकते है। अब बोर्ड ने आन फानन में अपने अधिकारियों को बचाने के लिये बूथों पर लाइसेंस देने के लियेे फीस 600 से बढा कर 15 हजार कर दी है। कुल मिला कर एक हंडी में दो पेट किये जा रहे है। ऐसे में यदि कैथल के ये लाइसेंस समाप्त होते है तो ये पूरे प्रदेश में इन नियमों को लागू करने के लिये कहेंगे।

बोर्ड ने एक काम के लिये बनाये गये दो नियम।
बोर्ड के द्वारा किसानों की फसल बेचने के लिये दो नियम बनाये गये। कुछ जगह आढ़ती दुकान की बजाये तम्बू लगाकर किसानों की फसल बेचने के लिये लाइसेंस जारी किये जाते है और मंडियों में करोड़ों की दुकानें लेने के लिये कहा जाता है। गरीब व्यक्ति इतनी मंहगी दुकान कैसे लेगा। जबकि सरकार द्वारा जारी बजट में ऐसी कोई नियम नही है।

मार्केट कमेटी के द्वारा रिन्यू बारे कागज व फीस भी नही लोटाई
आढ़तियों ने बताया कि कमेटी के द्वारा उनसे उनके लाइसेंस रिन्यू करने के लिये अप्रैल माह में कागज व फीस ली हुई है। सभी को डेरी नम्बर भी दिये हुये है। दो माह बाद भी न तो लाइसेंस रिन्यू किये गये और न ही रिन्यू न करने की सूचना दी गई। अब वे कमेटी में ही जमा है। एक महीने में डी डी व चेकों की मियाद खत्म हो जायेगी।

बोर्ड से आदेश न आने के चलते आढ़ती कोर्ट में चले गये- सचिव
इस बारे में कमेटी सचिव रोशन लाल ने बताया कि आढ़तियों के लाइसेंस रिन्यू के लिये कागज व फीस जमा है। बोर्ड से रिन्यू के लिये कोई आदेश नही आये और आढ़ती हाईकोर्ट में चले गये। 20 गुणा 85 पर एक लाइसेंस बनाया जा सकता है, दूसरा ब्लड रिलेशन में बन सकता है, परन्तु हमने 10 गुना 85 पर लाइसेंस की छूट दी हुई है। अब व 2017 के बाद बनने वाले सभी लाइसेंसों की जांच की जायेगी। लाइसेंस बनने व कार्य करने का एक ही पता होना चाहिये। नियम पुरा ने करने पर यदि कोई लाइसेंस गलती से बन गया या रिन्यू हो गया तो उसकी भी जांच पड़ताल होगी।
फोटो- केटीएल01- मार्केट कमेटी कैथल जिसके द्वारा रिन्यू किये जाने है लाइसेंस।

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