बैंकों में शुरू होगा सुधारों का नया दौर

0
387

24_12_2014-bank24a

नई दिल्ली। मोदी सरकार के एजेंडे में अब बैंकिंग क्षेत्र में सुधार सबसे ऊपर है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए साल की शुरुआत बैंकिंग सुधारों पर विचार-विमर्श से ही करने का फैसला किया है। मोदी अगले महीने की दो व तीन तारीख को वित्त मंत्री अरुण जेटली, वित्त मंत्रालय के आला अधिकारियों, सभी सरकारी बैंकों के प्रमुखों और बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों के साथ सुधार का एजेंडा तय करने के लिए बैठक करेंगे। पुणे में ‘ज्ञान संगम’ नाम से हो रहा यह आयोजन देश में अपनी तरह का पहला है। इसके आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र के यानी पीएसयू बैंकों में सुधार का ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा।

मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के सात महीनों में भी बैंकिंग क्षेत्र में कुछ अहम सुधारों को आगे बढ़ाकर अपनी मंशा साफ कर दी है कि वह लीक से हटकर चलने वाली है। पीएसयू बैंकों में केंद्र की हिस्सेदारी की सीमा घटाने व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी निजी हाथों में बेचने का फैसला हाल ही में किया गया है।

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री के साथ होने वाली इस बैठक के बाद बैंकों में कई सुधारों का काम आगे बढ़ सकेगा। बैठक में बैंकों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों पर अलग-अलग छह समूह बनाए गए हैं, जो बैठक समाप्त होने पर अपनी रिपोर्ट देंगे। दो दिनों की बैठक के अंत में प्रधानमंत्री संबोधित करेंगे। उनकी अध्यक्षता में होने वाली बैठक में आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी।

सूत्रों की मानें तो पीएम के साथ होने वाली बैठक के बाद सरकारी बैंकों में विलय व पुनर्गठन के लंबित मुद्दे की बात आगे बढ़ सकेगी। पूर्व राजग सरकार ने इस पर विचार-विमर्श शुरू किया था, लेकिन राजनीतिक सहमति के अभाव में बात नहीं बन पाई थी। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी इसके पक्ष में थे, लेकिन बैंक आगे नहीं आ पाए। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद ही बैंकों को कह दिया गया था कि वे विलय संबंधी प्रस्ताव आगे बढ़ाएं।

बैंकिंग में राजग के कदमः

1. आम जनता को बैंकों से जोड़ने के लिए जन धन योजना की शुरुआत

2. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में निजी क्षेत्र को हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी

3. पीएसयू बैंकों में सरकार की न्यूनतम हिस्सेदारी की सीमा घटाई

4. बैंकों के शीर्ष पदों पर नियुक्ति के पारदर्शी नियम बने

5. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को पूंजी जुटाने के नए तरीके दिए

6. जानबूझकर कर्ज नहीं लौटाने वाले ग्राहकों के खिलाफ कार्रवाई

भावी चुनौतियांः

1. बैंकों की विशाल पूंजी जरूरत के लिए रोडमैप बनाना

2. फंसे कर्जे की भारी-भरकम राशि वसूलने में बैंकों को मदद करना

3. छोटे और कमजोर बैंकों को मिलाकर बड़े आकार के बैंक बनाना

4. तकनीकी इस्तेमाल से बैंकिंग सेवा को गरीब जनता तक पहुंचाना

5. प्राथमिक क्षेत्र को कर्ज देने की मौजूदा नीति को प्रासंगिक बनाना

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here