भक्त का अटूट विश्वास सांई को चमत्कार करने के लिए मजबूर कर देता है : सुमित पोंदा

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भक्त का अटूट विश्वास सांई को चमत्कार करने के लिए मजबूर कर देता है : सुमित पोंदा
कहा-सुख पाने की चाहत में इंसान सारी उम्र दु:ख को ढोता रहता है
राजेश सांई ने बनाई कथा के दौरान बाबा की लाइव पेंटिंग, लञ्चकी ड्रा के माध्यम से सांई भञ्चत को दी गई
कैथल, 27 दिसंबर (कृष्ण गर्ग)
भाई उदय सिंह किले पर श्री शिरड़ी सांई शरणम धाम संस्था द्वारा आयोजित 5 दिवसीय श्री सांई अमृत कथा का बुधवार रात्रि को समापन हो गया। समापन अवसर पर कथावाचक सुमित भाई पोंदा ने सैकड़ों की संक्चया में पहुंचे श्रद्घालुओं को सांई रस की घुंटी पिलाते हुए उन्हें बाबा के चरणों में लीन कर दिया। सांई बाबा समाधि की 100वीं वर्षगांठ पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रवचन करते हुए सुमित पोंदा ने कहा कि विश्वास से उम्मीद बनती है और उम्मीद पर ही दुनिया कायम है। जिस इंसान के अंदर विश्वास की कमी है वो कभी भी सुखी नहीं रह सकता। बल्कि जिसके अंदर विश्वास नहीं है वो तो दुनिया का सबसे गरीब इंसान है। विश्वास वो ताकत है जो हम सबको चलायमान रखती है, विपरीत परिस्थितियों में टूटने नहीं देती, घुप्प अंधेरे में भी उजाले की ओर ले जाती है। विश्वास के दम पर ही असंभव संभव बन जाता है। साई चमत्कार नहीं करते बल्कि साई में हमारा विश्वास साई को चमत्कार करने के लिए मजबूर कर देता है। आखिर सांई को भी तो यह देखना है न कि हमारा विश्वास टूटे नहीं। विश्वास रखो, जीवन आराम से कट जाएगा। उन्होंने भञ्चतों को बताया कि सुख पाने की चाहत में इंसान सारी उम्र दु:ख को ढोता रहता है। वह सुख को सारी उम्र अपने बाहर ढूंढता है जबकि सुख अपने अगर अंदर नहीं तो कहीं नहीं। हमें कोई कभी सुखी कर ही नहीं सकता अगर हम अपने आप को सुखी नहीं कर सकते। सुख मांगने पर नहीं, जागने पर मिलता है। जब यह बात समझ में आ जाती है कि सुख की तलाश ही व्यर्थ है और जो कुछ भी हमारे साथ घटित हो रहा है, उसी में सुख है तो यह जागृति है। यही जीवन की सुबह है। यही अरुणोदय है क्योंकि सूरज का निकलना कोई मायने नहीं रखता अगर हम स्वयं ही सो रहे हैं। जागो, सुख का सूरज उग चुका है। उन्होंने इंसान प्रवृîिा पर बोलते हुए कहा कि निंदा अगर किसी के सामने, अकेले में, उसके सुधार के लिए की जाए तो वह सकारात्मक क्रिया है। अगर यही निंदा केवल किसी के दोष उजागर करने के लिए, किसी और के सामने, संबंधित व्यक्ति की पीठ के पीछे की जाए तो वह नकारात्मक क्रिया है और हमारे व्यक्तित्व को दूषित करती है। पर निंदा में आनंद आने लगे तो समझो कि हम ख़ुद बहकने लगे हैं, बिगडऩे लगे हैं क्योंकि जब हम किसी की अनावश्यक बुराई करते हैं तो वही दोष हमारे चरित्र के भीतर अंजाने ही बैठने लगते हैं। हमारी आत्मा उनको अपनी ओर आकर्षित करने लगती है और हम समझें उसके पहले ही हम बिगड़ जाते हैं। निंदा मत करो। सुझाव भी बिन मांगे मत दो। सुमित पोंदा ने भञ्चतों को बताया कि प्रार्थना शुक्राने के तौर पर की जाये तो ठीक है। प्रार्थना अगर आराधना के लिए की जाये तो और भी अच्छा। प्रार्थना यदि किसी और के भले के लिए की जाये तो सर्वश्रेष्ठ लेकिन प्रार्थना अगर उस परम शक्ति से अपने लिए मांगने के लिए की जाये तो वह प्रार्थना नहीं कहलाएगी। जिस प्रार्थना में इच्छाओं का समावेश हो जाता है वह प्रार्थना दूषित हो जाती है। उसमें मतलब शामिल हो जाता है। वह प्रार्थना कमजोर बन जाती है। प्रार्थना के लिए कोई मंत्र इत्यादि की जरूरत भी नहीं है। सच्ची प्रार्थना किसी सामग्री की मोहताज भी नहीं है। बस, सच्चा, सरल और समग्र भाव हो। ऐसी प्रार्थना तुरंत मंजूर हो जाती है। सांई अमृत कथा के दौरान सांई भञ्चत पूरी तरह सांई भञ्चित में लीन दिखाई दिए और सुमित पोंदा द्वारा गाए भजनों में भी भञ्चतों की सरगम साथ रही। इस अवसर पर साई मंदिर के मुक्चय पुजारी आचार्य विकास लेखवार, मुकेश चावला, पंडित राजीव शर्मा करेंगे, साई मंदिर के प्रमुख सदस्य समाजसेवी कैलाश भगत, अनिल तिवारी, नवीन मल्होत्रा, भारत खुराना, बक्चशीश गिरधर, नवीनपाल, जतिन गांधी, नीतिन गुगलानी, लाजपत गुप्ता, रामनारायण शर्मा, मनोहर विरमानी, अनिल गिरधर, डा. राकेश चावला, सुशील रहेजा, पवन भारती, कृष्ण सलूजा, सुरेन्द्र छाबड़ा, मनोज खुराना, अनिल सलूजा, महेन्द्र कामरा, जगदीश पवार, धर्मवीर भोला , मनोज आनंद, राजेश शर्मा, यशपाल, अनिल सैनी, हरिचंद जांगड़ा, सीपी अरोड़ा , मुकेश धीमान, अनीश गुप्ता, आत्म मिड्डा , प्रवीन बिंदलिश, ललित ठकराल , गौरव छाबड़ा , नीरज ढींगरा , कर्ण कुमार, अंकुश कुमार, गुरमीत सैनी और अक्षय मेहता आदि मौजूद थे।
बॉञ्चस
कथा के दौरान की लाइव पेंटिंग :
इस सांई अमृत कथा के अंतिम दिन दिल्ली से विश्वविक्चयात कलाकार राजेश सांई विशेष रूप से पहुंचे जिन्होंने सांई कथा के दौरान सांई बाबा की लाइव पेंटिंग बनाकर सबको चकित कर दिया। सभी श्रद्घालु इस लाइव पेंटिंग का अद्भुत दृश्य देख रहे थे। लञ्चकी ड्रा द्वारा यह पेंटिंग सांई भञ्चत को दी गई। इसके अलावा लञ्चकी ड्रा में सांई बाबा के वस्त्र, सांई बाबा सच्चरित्र एवं सांई प्रतिमा भी सांई भञ्चतों को दी गई।

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