भाना गांव का एक किसान आंदोलन के दौरान शहीद

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कैथल, 31 दिसंबर ( कृष्ण गर्ग)
वर्ष 2020 जाते- जाते भी पाई क्षेत्र के लोगों के लिये दुखद रहा है। साल के आखिरी दिन निकटवर्ती भाना गांव का एक किसान आंदोलन के दौरान शहीद हो गया। कैथल अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद पाई से सेकड़ों वाहनों के साथ एक सम्मान के साथ उनके गांव भाना में ले जाकर अन्तिम संस्कार किया गया। संस्कार के दौरान कई हजारों की संख्या में किसान व मजदूरों व आम लोगों ने भाग लिया।
पाई के उसके साथी वीरेंद्र ढुल पाई ने बताया कि गांव का यह रामकुमार नामक किसान 20 दिन पहले क्षेत्र के किसानों के साथ ठीकरी बार्डर पर गया था और पाई की रसोई में किसान मजदूरों के लिये खाना देने का कार्य कर रहा था। 30 दिसम्बर को लगभग तीन बजे यह रात के खाने के लिये सब्जी लेने के लिये बल्लभगढ़ सब्जी मंडी में गया था, जहां पर उसके दिमाग की नस पट गई। जिस कारण से उसको तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां से उसको प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत रोहतक पी जी आई रैपर कर दिया। जहां पर उसने दम तोड़ दिया। उसने बताया कि वहां से उसको कैथल अस्पताल पोस्टमार्टम के लिये लाया गया। पोस्टमार्टम के बाद उसको पाई सिसमोर रोड़ से सेकड़ों ट्रैक्टरों व अन्य वाहन के काफिले के साथ नारे लगाते हुये भाना ले जाया गया। उसके अन्तिम संस्कार में कांग्रेस के नेता सतवीर भाना, सुदीप सुरजेवाला तथा दर्जनों नजदीकी गांव के लोगों ने भाग लिया। संस्कार पर ले जाते हुये लोगों न सरकार के नारे लगाये और कहा कि जब तक सूरज चांद रहेगा, राम कुमार तेरा नाम रहेगा, इंकलाब जिंदा बाद। किसानों ने कहा की सरकार की किसान मजदूर विरोधी काले कानूनों के चलते हमारा यह किसान शहीद हुआ है। जिसको कभी भुलाया नही जा सकता।
फोटो- पी01

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