मंडी की चार दीवारी से बाहर पड़ी धान की एक भी ढेरी की खरीद नही

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कैथल, कृष्ण गर्ग
सरकार के द्वारा किसानों की धान की फसल का दाना- दाना खरीद करने के दावे उस समय फैल हो गये, जब कैथल के एस डी एम, कमेटी डी एम ई ओ तथा कमेटी सचिव ने किसानों से एक लवज में साफ कर दिया कि मंडी की चार दीवारी से बाहर पड़ी धान की एक भी ढेरी की खरीद नही की जायेगी, बेशक से किसान द्वारा अपने आढ़ती के पास ही क्यों न डाली हो। उधर किसानों की धान की खरीद का कोई उचित प्रबंध न निकलते देख एस डी एम ने पत्रकारों के साथ भी झपट पड़े। बाद में किसानों की समस्या हल न होते देख वे बीच में ही उठ कर चले गये।
कैथल की नई अनाज मंडी में सोमवार को किसान यूनियन के बैनर तले कुछ किसानों ने जिला अध्यक्ष होशियार सिंह गिल की अध्यक्षता में मंडी का दौरा किया और खरीद में कई कामिया नजर पाई। जिस पर किसानों ने सरकार व जिला प्रशासन के के खिलाफ जम कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की सुचना पाकर कैथल के एस डी एम संजय कुमार मार्केट कमेटी में पहुंचे और किसानों की समस्या जानने लगे। किसानों ने बताया कि उनकी धान की फसल की खरीद सही प्रकार से नही हो रही। जो खरीद सरकारी एजेंसियां करके ले जाती है, वह फसल न तो कई दिनों तक तुलती और उनसे पंखे के नाम पर पचास रुपये प्रति क्विंटल कट लगाने की कहते है। मंडी के कई गेट बंद है और पेयजल का भी कोई प्रबंध नही है। उनकी फसल के न तो गेट पास कट रहे और न ही किसानों के पास मैसेज आ रहे। सोंगल गांव के किसान चांदी राम ने बताया कि उसकी फसल का माऊचर 17 की बजाये 14.50 है। उसकी फसल सरकारी खरीद एजेंसियों ने पास करके 1888 रेट में लिखा था, परन्तु अब उसी धान को खरीद एजेंसी ने तुलवाने की कही थी, वह कट लगाकर केवल 1750 रुपये के दाम की कह रहा है। एक अन्य किसान राजवीर ने बताया कि फसल सरकार के द्वारा खरीद की गई थी, परन्तु तुलवाने वाला राइस मिल वाला पंखे के नाम पर पचास रुपये का कट लगा रहा है। एक किसान ने बताया कि वह अपने आढ़ती के पास कई दिनों से धान लेकर आया था, परन्तु उसको कोई नही खरीद रहा। मंडी में जाम के कारण उसकी फसल मंडी से बाहर है।
इस पर एस डी एम संजय कुमार, कमेटी डी एम ई ओ अजय श्योराण, सचिव दीपक ने कहा कि मंडी से बाहर किसानों की कोई फसल की ढ़ेरी नही ली जायेगी। किसान आढ़ती को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कट न दे, यदि किसान को कम पैसे मिलते है तो वह लिखित में शिकायत करे। डी एम ई ओ ने बताया कि उनके पास ऐसी एक शिकायत आई है। यदि किसान उनको शिकायत नही कर सकता तो वह टोल फ्री नम्बर पर काल करके शिकायत करे, कार्रवाई होगी। मैसेज उपर से आने है और साइट बहुत कमजोर चल रही है। इसके अलावा किसानों ने अनेक समस्यायें एस डी एम के आगे रखी। एस डी एम ने वहां उपस्थित पत्रकारों को कहा कि उनकी यह सिक्रेट बैठक है और पत्रकार यहां आने ने चाहिये थे, तो क्यों आये। पत्रकारों ने कहा कि यह सिक्रेट बैठक नही, अपितु किसान प्रदर्शन कर अपनी समस्या रख रहे है और उनकी आवाज उठाना उनका दायित्व है।
किसानों की समस्या सुन कर एस डी एम ने मंडी प्रधान कृष्ण मितल को बुलाया और स्थित के बारे में जाना। प्रधान ने बताया कि खरीद की गई एजेंसियों के द्वारा जो धान खरीद किया जा रहा उसका तोल हो रहा है। मंडी में मजदूर बड़ा पावर का पंखा सफाई के लिये नही लगाते और इस बारे में कल आप से बात हुई थी कि पंखे न लगाने पर किसान से 50 रुपये प्रति क्विंटल काटा जायेगा। इस एस डी एम ने कहा कि उन्होंने ऐसा कब कहा। इस पर प्रधान व एस डी एम उठ कर चले गये।
मंडी में है अघोषित हड़ताल।
मंडी में पंखे के नाम पर पचास रुपये प्रति क्विंटल का कट लगाने के नाम पर एस डी एम ने इंकार करते हुये कहा कि किसान को पुरी कीमत मिलेगी तो मंडी में मुनादी की गई की सरकार के द्वारा खरीद कि गई प्रत्येक ढेरी की सफाई पावर के पंखे से होगी, परन्तु मंडी में मजदूर पावर पंखे से सफाई नही करते। जिस कारण से न पंखा लगाना, न किसान की फसल बिक कर तुलनी। यह एक प्रकार की हड़ताल हो गई।
फोटो सहित

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