सरकार द्वारा किसानों के ब्याज के रूप में आढ़तियों से काटी गई अरबों की राशि, पता नही मिलेंगी या नही, यह कहां पड़ी है, इसका भी नही पता।

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सरकार द्वारा किसानों के ब्याज के रूप में आढ़तियों से काटी गई अरबों की राशि, पता नही मिलेंगी या नही,
यह कहां पड़ी है, इसका भी नही पता।
कैथल, 11 फरवरी (कृष्ण गर्ग)
प्रदेश सरकार के द्वारा किसानों के ब्याज के नाम पर आढ़तियों की आढ़त में से पिछले लगभग 9 महीने से अरबों रुपये की राशि रोक रखी है। इतनी बढ़ी राशि रोके के बाद भी विभाग के पास इसका कोई रिकार्ड नही है और न ही यह पता कि यह राशि किसानों को ब्याज के रूप में या फिर आढ़तियों की मांग के बाद वापिस आढ़तियों को दी जायेंगी। इसका खुलासा एक आर टी आई के माध्यम से हुआ है। आर टी आई कार्य कर्ता कृष्ण लाल ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय के जन सुचना अधिकारी एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव खाद्य नियंत्रक पी के दास से सुचना मांगी थी कि वर्ष 2020 में गेहूं के सीजन में प्रदेश की मंडियों के आढ़तियों की आढ़त में से जिला अनुसार ब्याज के रूप में काटी गई राशि, किसानों को या आढ़तियों को वापस मिलेगी या नही तथा कब मिलेगी और रोके का कारण जाना गया था। इस पर विभाग ने बताया कि इसके बारे में उनके विभाग व गेहूं खरीद एजेंसियों के मुख्यालयों में इस बारे में कोई भी जानकारी नही है। किसानों को भुगतान जिला मुख्यालयों से बजट के अनुसार किया जाता है तो वहां से यह जानकारी प्राप्त करे।

क्या है मामला।
पिछले वर्ष 2020 में गेहूं के सीजन में किसानों की फसल का भुगतान पहले सरकार के निर्देश पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति चंडीगढ़ के द्वारा पहले आढ़तियों के खाते में लगभग 15 से 30 दिनों के अंदर किया गया और आढ़तियों को निर्देश दिये गये कि वे किसानों की यह राशि पोर्टल के द्वारा दुबारा से तीन दिन के अंदर सरकार के द्वारा तय सरकारी कम्पनी के खाते में की जाये। उसके बाद सरकार कम्पनी के माध्यम से किसान को उसकी फसल का भुगतान सीधा उसके खाते में किया जायेगा। आढ़तियों ने ऐसा ही किया परन्तु भुगतान आढ़तियों के खाते में बैंक समय के बाद आने तथा आगे सरकारी छुट्टियां होने के चलते सरकार दुबारा से पोर्टल के द्वारा वापस करने में तीन दिन से ज्यादा लग गये। जिस कारण से सरकार ने खरीद एजेंसियों के माध्यम से इस देरी का भुगतान करने पर आढ़तियों की आढ़त में से ब्याज के रूप में कुछ राशि काट ली गई। पाई मंडी के आढ़ती रणधीर सिंह एंड संस ने बताया कि एक एक आढ़ती से यह राशि हजारों व लाखों की राशि को अवैध रूप से काट लिया गया। पूरे हरियाणा में यह अरबों रुपये की बनती है और सरकार के द्वारा इस विभाग के माध्यम से न तो किसानों को दी गई और न ही आढ़तियों को उनकी मांग के बाद वापस दी गई।

जिला मुख्यालयों पर नही है जानकारी।
आर टी आई के द्वारा सरकार व उनके विभाग तथा खरीद एजेंसियों के द्वारा ऐसी जानकारी से इंकार कर जिला मुख्यालयों पर उनके खाद्य नियंत्रकों पर से जानकारी लेने की कही गई तो कैथल के जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक प्रमोद शर्मा ने कहा कि उनके पास इसकी जानकारी नही है और उनके विभाग के अनुभाग से सम्पर्क करके जानकारी ले ले। जिस पर विभाग के अनुभाग के अधिकारी रमेश कुमार ने बताया कि विभागों के पास ब्याज काट कर जो राशि आढ़त की बनती थी उसका बजट बनाकर भेजने का सरकार का निर्देश था और ब्याज काट कर आढ़त का बजट बनाया गया था, जो सरकार ने भेज दिया था। वह आढ़तियों को कर दिया गया था। सरकार के मुख्यालय पर खरीद की गई सारी फसल की जो आढ़त बनती है, उसमें से यह ब्याज काट कर आई राशि जो आढ़तियों को दी गई, बाकी की राशि का हिसाब सरकार के खाद्य मुख्यालय पर ही है। यह राशि सरकार के आदेशानुसार ही बजट के माध्यम से दी जायेगी।

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