सरकार द्वारा ये आदेश जारी तो कर दिये परन्तु खरीद की डगर पाना खरीद एजेंसियों के लिये नामुमकिन होगा

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कैथल, कृष्ण गर्ग
सरकार के आदेशानुसार एक अप्रैल से प्रदेश की मंडियों में गेहूं की खरीद का कार्य शुरू हो चुका है। जिसके लिये सरकार ने खरीद एजेंसियों को अब की एसोसिएशन की बजाये सीधे तौर पर खरीद करने के आदेश दिये है। सरकार द्वारा ये आदेश जारी तो कर दिये परन्तु खरीद की डगर पाना खरीद एजेंसियों के लिये नामुमकिन होगा। गुप्त सूत्रों से यह भी पता चला कि खरीद एजेंसियों ने सरकार को इस तरह खरीद करने से मना किया है। खरीद एजेंसियों ने सरकार को इस पर दुबारा से विचार करने के लिये कहा है। यह भी पता चला कि इन खरीद एजेंसियों से सरकार से आग्रह किया है कि पहले ही उनके पास कर्मचारियों की कमी है और उसके बावजूद अब की बार कर्मचारियों की चुनाव में भी डयूटी लगी है। जिस कारण से वे नये आदेशों के अनुसार गेहूं की खरीद सीधे तौर पर नही कर सकते।
यहां यह भी उल्लेख करना जरूरी है कि मंडी में केवल किसानों की गेहूं की खरीद करने का कार्य खरीद तक सीमित नही है, अपितु अनेक कार्य करने होते है। मंडी प्रधान कृष्ण मितल ने बताया कि खरीद एजेंसियों से बारदाना लाकर मंडी के आढ़तियों में बांटना, खरीद के बिल एकत्र कर सारे बिलों का एक बिल तैयार करना, खाली- भरे बारदाने का हिसाब किताब रखना, तुले हुई बोरियों का लदान करवाना व उनके गेट पास काटना आदि इसके अलावा ऐसे अनेक कार्य करने होते है, जिसके लिये कई दर्जनों कर्मचारियों की जरूरत अलग से पड़ती है। इतना कार्य करने के बदले में खरीद एजेंसी एसोसिएशन को मात्र 15 पैसे प्रति बोरी के हिसाब से कमीशन देती है। अब सरकार ने यह 15 पैसे बचाने के लिये खरीद सीधे तौर पर करने के आदेश दिये है।
यदि खरीद सीधी हुई तो किसान व आढ़ती होगे परेशान- आढ़ती
मंडी के आढ़ती रामनारायण, पवन बंसल आदि ने बताया कि किसानों की गेहूं की फसल पक कर एक दम पककर तैयार होती है और मंडी में कम्बाइन के द्वारा कट कर एक दम आती है। यदि खरीद एजेंसी सीधे तौर पर खरीद करती है तो ऐसे में समय पर न तो खरीद होगी, न आढ़तियों को गेहूं की फसल बांटने के लिये बारदाना मिलेगा और न ही समय पर लदान होगा। जिसे किसानों को कई- कई दिन इंतजार करना पड़ सकता है।

सीधे तौर पर खरीद करने से मंडी से होगी करोड़ों की अवैध वसूली
मंडी के आढ़ती ओमप्रकाश जैन ने बताया कि मंडी एसोसिएशन लदान का ठेका लेने वाले ठेकेदार के वाहन लाइन अनुसार नम्बर अनुसार दुकानों से खरीद किया गया गेहूं का लदान करवाया जाता है। दो साल से पहले मंडी से खरीद एजेंसी सीधे लदान करवाती थी। जिसे लदान वाहन प्रति कटा 10 रुपये तक रिश्वत के लेते थे। दो साल से यह कार्य एसोसिएशन द्वारा अपने हाथ लिया गया और इस करोड़ों की अवैध वसूली को बंद किया गया।

मंडी की दोनों एसोसिएशन का खरीद कार्य में रुख रहेगा अलग- अलग
न्यू फूड ग्रेन डीलर एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मितल ने बताया कि यदि एसोसिएशन को पहले की तरह कमीशन नही मिलेगा तो उनकी एसोसिएशन बारदाना बांटने, खाली भरे का हिसाब किताब रखने व लदान का नही करेंगी। उधर दी कैथल फूड ग्रेन डीलर के प्रधान शमशेर ने बताया कि आढ़तियों की समस्याओं को देखते हुये और लदान में लुटने से बचाने के लिये उनकी एसोसिएशन बिना कमीशन भी सभी कार्य करेंगी।

सरकार के आदेशानुसार सीधी होगी खरीद- डी एफ एस सी
इस बारे में डी एफ एस सी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि खरीद में दिक्कत तो आयेगी, परन्तु आदेशानुसार खरीद होगी। किसी भी एजेंसी ने न तो मना किया और न सरकार को कुछ लिखा। वैसे भी खरीद कर्मचारियों की चुनाव में कोई डयूटी नही है।

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