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करोडा गांव में शनिवार को दादी सती महोत्सव धूमधाम से मनाया गया

कैथल, 12 अगस्त  (कृष्ण गर्ग)
करोडा गांव में शनिवार को दादी सती महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। दादी सती समिति के प्रधान सत्यवान ने बताया कि लगभग 850 वर्ष पूर्व जींद जिले के गांव बिठमड़ा की एक लडक़ी की शादी करोड़ा गांव में हुई थी। करोडा का युवक पशु चराने का कार्य करता था। विवाह के उपरान्त लडक़ी अपने मायके में ही रहती थी। एक दिन पशु चराने के दौरान उसके पति को सांप ने काट लिया और उसकी मौत हो गई। मौत होने के तीन दिन तक उसका शव किसी भी ग्रामीण को खोज करने के दौरान नही मिला। तीन दिन के बाद उसके पति ने लडक़ी के सपने में आकर दर्शन दिया और बताया कि उसका शव उस जगह पर झाड़ी के पास पड़ा। लडक़ी के बताने पर ग्रामीणों उसी जगह से शव मिल गया। जिस समय उसका संस्कार किया जाने लगा तो लडक़ी उसके साथ सती होने पर अड़ गई। इस पर ग्रामीणों ने उसके सत का सबूत मांगा तो उसने अपने दो पांव के बीच आग सुलगा कर खीर बनाई और ऐसा करते उसके पांव नही जले। उसके बाद वह अपने पति के साथ एक ही चिता में सती हो गई। उसी समय से भादव बद् िपंचम से यह महोत्सव मनाया जाने लगा। इस दिन उनकी समाधि पर पूजा अर्चना होती है और भंडारे का आयोजन होता है। कोई भी कार्य करने से पूर्व दादी सती की पूजा कि जाती है। इस अवसर पर रामनिवास, ओमप्रकाश, रतन, विनोद, सुभाष, वेद प्रकाश, सतवीर आदि अनेक समिति के सदस्य उपस्थित थे।

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