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वर्षा ऋतु के दौरान फैलने वाली डेंगू जै्रसी बीमारियों से सतर्क रहें-उपायुक्त

कैथल , 29 सितम्बर(कृष्ण गर्ग)
उपायुक्त सुनीता वर्मा ने जिला वासियों का आह्वान किया है कि वे वर्षा ऋतु के दौरान फैलने वाली डेंगू जै्रसी बीमारियों से सतर्क रहें। इन बीमारियों से बचाव के तरीके अपनाएं तथा इनसे भयभीत न होकर समय पर उपचार करवाएं। अपने कूलर, रैफ्रीजरेटर, पानी की टंकियों, पक्षियों के पीने के पानी के बर्तनों, फूलदान, नारियल का खोल, टूटे हुए बर्तनों व पुराने टायरों में जमा पानी को सप्ताह में एक बार अवश्य बदलें। डेंगू का मच्छर खड़े हुए साफ पानी में ही पनपता है। पानी के श्रोतों को ढक कर रखें।
मती सुनीता वर्मा ने बताया कि डेंगू की बीमारी मादा एडिज एजिप्टाई नामक मच्छर के काटने से फैलती है, जो खडे हुए साफ पानी में पनपता है। यह मच्छर आमतौर पर दिन के समय काटता है। इस मच्छर की संरचना हल्के भूरे रंग की होती है, जिसके शरीर पर शेर के शरीर की तरह सफेद रंग के गोल छल्ले बने होते हैं। यह मच्छर प्राय मानसून के बाद 15 डिग्री सैंटीगे्रट से 25 डिग्री सैंटीग्रेट के तापमान में पनपता है। डेंगू के लक्ष्णों में बहुत तेज बुखार होना, आंखों को घुमाते समय आंखों के पीछे वाले हिस्से में बहुत ज्यादा दर्द होना, तेज सिर दर्द होना, शरीर पर गुलाबी चकते उभरना, जी मिचलाना व उल्टियां आना, लसिका ग्रंथियों का बढ जाना, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द होना तथा मुंह, नाक व मसूड़ों से खून आना शामिल हैं। यह मच्छर घरों में रखे हुए कूलर, फ्रिज, पानी की टंकियों, नारियल के खोल, घरों की छतों पर पक्षियों के पीने हेतू रखे गए पानी के बर्तनों, पशुओं के पीने के लिए बनाई गई पानी की होदियों तथा घरों की छतों पर रखे हुए व्यर्थ टायरों में जमा पानी के अंदर अंडे देता है तथा लगभग 8 से 10 दिन अवधि में व्यस्क मच्छर का आकार ले लेता है। यह मच्छर घरों के अंदर ही रहता है तथा लगभग 100 से 500 मीटर की दायरे में स्थित सभी घरों में पहुंच जाता है।
उन्होंने बताया कि डेंगू से बचाव के लिए घरों के आस-पास पानी न खड़ा होने दें तथा व्यर्थ बने हुए गड्ढों को मिट्टी से भर दें। घरों में रखे कूलर, पानी की टंकियों, पक्षियों के पीने के पानी के बर्तनों, पशुओं की पानी की होदियों व फ्रिज को सप्ताह में एक बार अवश्य खाली करें तथा अच्छी तरह सुखाने के बाद ही दोबारा प्रयोग में लाएं। घरों के आस-पास स्थित खाली प्लाटों में खड़े पानी में कैरोसीन अथवा कटा हुआ काला तेल डालें ताकि मच्छर अंडे न दे सकें। रात को सोते समय कीट नाशक से उपचारित मच्छरदानी या ओडोमास का प्रयोग करें। अपने घरों के दरवाजे व खिड़कियों पर जाली लगवाएं। शरीर को पूर्ण रूप से ढकने वाले वस्त्र पहनें, बुखार होने की स्थिति में स्वयं कोई दवाई न लें तथा अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र व नागरिक अस्पताल में जा कर रक्त की जांच करवाएं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन केंद्रों में खून की जांच निशुल्क की जाती है।

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