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अनाज मंडी किसानों की धान की फसल खचाखच भर गई, कोई पुख्ता प्रबंध नही

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कैथल , 29 सितम्बर(कृष्ण गर्ग)
कैथल की अनाज मंडी किसानों की धान की फसल खचाखच भर गई है, जिसमें न तो सरकारी खरीद शुरू हुई और नही कोई पुख्ता प्रबंध। ना ही मार्कट कमेटी के द्वारा निलामी और न ही खुली बिक्री। सुरक्षा राम भरोसे। व्यापारियों की आर्थिक स्थिति के चलते भी आ रही किसानों को परेशानी। किसान संदीप, कृष्ण, रामकला, बलवीर, रामचंद्र, काला, राजवीर आदि ने बताया कि इस समय मंडी में किसानों की सुपर फाइन व 1509 किस्म की धाम अनाज मंडी में आ रही है। दो किस्मों की धान की आवक इस समय लगभग 30, 40 हजार बोरी की है। सरकार द्वारा 26 सितम्बर से सुपर फाईन किस्म की धान की खरीद शुरू करने का वादा किया था, परन्तु सरकार अपने इस निर्णय पर कायम नही रही। इस तय सीमा को बीते हुये तीन दिन हो गये है। अभी तक किसी भी सरकारी खरीद एजेंसी के अधिकारी अनाज मंडी में किसानों की धान खरीद करने के लिये नही आये। इस किस्म की धान मंडी के अंदर 1300 रुपये से लेकर 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक आढ़तीयों के द्वारा बेची जा रही है, जबकि सरकार द्वारा इस किस्म की धान का सरकारी समर्थन मूल्य 1590 रुपये घोषित कर रखा है। किसानों की यह किस्म की धान काफी कम मूल्य पर व्यापारियों के द्वारा की जा रही है। कमेटी के द्वारा इस किस्म की धान की निलामी मात्र दो घंटे करवाने की घोषणा तो की हुई है, परन्तु व्यापारी अपनी मनमानी के चलते मात्र आधे घंटे के अंतराल के बाद ही सरकारी निलामी बंद करके खुली निलामी में ही किसानों की धान की फसल की खरीद करते है। यही हाल 1509 किस्म की धान का है। सरकारी निलामी मात्र कम समय के लिये ही चलती है। उसके बाद खुली बिक्री के द्वारा काफी कम मूल्य पर किसानों की यह धान की फसल बिकती है।
नही कोई पुख्ता प्रबंध
किसानों ने बताया कि मंडी में हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। सडक़ों पर कुछ किसान अपने वाहन खड़े करके कही दूर चले जाते है। जबकी जिला प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि मंडी के अंदर खाली वाहनों को मंडी से बाहर निकलवाये। मजदूर भी सडक़ के बीच में तिरछाा वाहन खड़ा करके लदान का कार्य करते है। इनको को भी काई कहने सुनने वाला नही है। जिला प्रशासन को मंडी के अंदर किसानों की समस्या को देखते हुये पुलिस कर्मचारियों की डयूटी लगानी चाहिये, जो खाली वाहन को बाहर निकलवाये और मजदूरों को सही प्रकार से रास्ता छोड़ कर लदान वाला वाहन खड़़ा करवाये। ताकि किसानों को अपनी फसल डालने में जाम से बचाया जा सके।
व्यापारियों की आर्थिक स्थिति भी आ रही आड़े।
किसानों ने यह भी बताया कि कुछ व्यापारियों की आर्थिक स्थिति कमजोर है और कुछ आढ़ती उनको किसानों की फसल इस लिये नही बेचते कि कही उनकी पेयमेंट न डुब जाये। मंडी में अधिक धान आने के कारण सभी किसानों की धान की फसल की निलामी नही कि जा सकती। जिस कारण से सुबह दो घंटे धान की निलामी सरकारी की जाती है और उसके बाद खुली बोली के द्वारा धान बेची जाती है। सरकारी निलामी से धान के रेट का पता चलता है। आर्थिक स्थिति कमजोर वाले व्यापारी सरकारी निलामी के द्वारा फसल को बहुत अधिक दामों पर खरीद करते है, परन्तु बाद में खुली निलामीके द्वारा अच्छे व्यापारी कम दामों पर उसकी किस्म की धान को कम मूल्य पर। किसानों के सामने यह गम्भीर समस्या है। सभी किसानों को एक जैसी फसल के एक जैसे दाम मिलने चाहिये।
मात्र अखबारों में ही आये आदेश- डी एम ई ओ।
इस बारे में मार्केट कमेटी के कार्यकारी सचिव एवं डी एम ई ओ अजय श्योराण ने बताया कि 26 सितम्बर से बिक्री के आदेश मात्र अखबारों में ही आये है, न कि उनके पास सरकारी आदेश। एक अक्तूबर से सरकारी खरीद के आदेश आये हुये है और उसी समय से खरीद शुरू हो जायेगी।

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